जितिया व्रत नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है. संतान की दीर्घायु की कामना को लेकर महिलाओं ने उपवास रखा. कतरास के मछली बाजार में ₹1 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ.
कतरास. संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ तीन दिवसीय जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत शुरू हो गया. पर्व को लेकर महिलाओं में खास उत्साह रहा. महिलाओं ने स्नान-ध्यान कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और नहाय-खाय के दिन पारंपरिक भोजन ग्रहण किया. रविवार को व्रत का समापन होगा.नहाय-खाय पर मछली बाजार रहा गुलजार
जितिया के नहाय-खाय के दिन मछली खाने की परंपरा के कारण शुक्रवार को कतरास और आसपास के मछली बाजारों में काफी चहल-पहल रही. कतरास बाजार, हटिया, मछली पट्टी, भटमुड़ना, सोनारडीह, कांको, श्यामडीह और राहुल चौक समेत आसपास के इलाकों में सुबह से ही मछली खरीदने वालों की भीड़ जुटने लगी.
अहले सुबह से दोपहर तक मछली दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बनी रही. कई दुकानों पर खरीदार अपनी बारी का इंतजार करते नजर आये. नहाय-खाय को लेकर मछली की बढ़ी मांग का असर बाजार में साफ दिखाई दिया.
मछली कारोबारियों में भी दिखा उत्साह
मछली विक्रेता कैलाश केवट ने बताया कि जितिया के नहाय-खाय के दिन हर वर्ष मछली की मांग बढ़ जाती है. पर्व को लेकर बड़ी संख्या में लोग मछली खरीदने बाजार पहुंचते हैं.
कारोबारियों के अनुसार, शुक्रवार को कतरास और आसपास के बाजारों में मछली का कारोबार एक करोड़ रुपये से अधिक रहा. पर्व को लेकर बाजार में सुबह से दोपहर तक खरीदारी का सिलसिला जारी रहा. इससे मछली कारोबारियों में भी उत्साह देखने को मिला.
संतान की मंगलकामना को लेकर रखा जाता है व्रत
जितिया पर्व को संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. इस दौरान महिलाएं अपने पुत्रों की रक्षा और मंगलकामना के लिए व्रत रखती हैं. पर्व के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है.
जितिया पर्व बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के मिथिलांचल क्षेत्र में विशेष आस्था के साथ मनाया जाता है. इसे कठिन व्रतों में शामिल किया जाता है. लोकगीतों में भी जितिया पर्व की महत्ता का वर्णन मिलता है.



