रांची: झारखंड में सरकारी नौकरी की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता, पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार, 10 अगस्त 2026 को JPSC और JSSC अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर झारखंड विधानसभा की ओर मार्च किया।
विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग की। स्थिति बिगड़ने पर वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने झारखंड के छात्र आंदोलन पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है।
अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में “झारखंडच्या विद्यार्थ्यांशी एकजूट” यानी झारखंड के विद्यार्थियों के साथ एकजुटता जताई।
उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब राजधानी रांची में छात्रों का प्रदर्शन विधानसभा तक पहुंच गया है और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
आखिर क्यों आंदोलन कर रहे हैं झारखंड के छात्र?

छात्रों का कहना है कि JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक और परिणामों में अनियमितता जैसे मुद्दों को लेकर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
1. JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि कई भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। अभ्यर्थी चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
2. JSSC-CGL पेपर लीक का मुद्दा
JSSC-CGL परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले ने भी अभ्यर्थियों के बीच नाराजगी बढ़ाई है। छात्रों का कहना है कि ऐसे मामलों से भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है और वर्षों से तैयारी कर रहे युवाओं के भविष्य पर असर पड़ता है।
3. JPSC 14वीं प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट पर सवाल
JPSC की 14वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के प्रारंभिक परिणाम को लेकर भी अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं। छात्रों की ओर से परिणाम प्रक्रिया, कटऑफ और OMR से जुड़े विभिन्न मुद्दों की जांच की मांग की जा रही है।
4. CBI या स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
छात्र संगठनों की प्रमुख मांगों में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच शामिल है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि पूरे मामले की जांच CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए और यदि गड़बड़ी साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।
5. युवाओं के भविष्य और रोजगार का सवाल
सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले कई युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। परीक्षा रद्द होने, प्रक्रिया लंबी खिंचने या पेपर लीक जैसे विवादों के कारण अभ्यर्थियों के समय, उम्र और भविष्य की संभावनाओं पर असर पड़ता है। इसी वजह से छात्रों का कहना है कि सरकार को भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
तीन परीक्षाएं रद्द करने पर बनी सहमति, लेकिन मांगों पर पेंच
छात्र आंदोलन को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के बीच बातचीत के कई दौर हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि सरकार ने तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताई है, लेकिन CBI जांच समेत अन्य मांगों को लेकर छात्रों की नाराजगी अभी खत्म नहीं हुई है। छात्रों का कहना है कि सिर्फ परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं है। कथित गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निष्पक्ष जांच भी जरूरी है। इसी बीच JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे की खबर ने भी इस पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया है।
विधानसभा मार्च को लेकर रांची में हाई अलर्ट
छात्रों के विधानसभा मार्च को देखते हुए रांची में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। विधानसभा परिसर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई। स्थिति को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस की ओर से वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया। प्रदर्शनकारियों की ओर से भी पुलिस पर पानी की बोतलें और चप्पलें फेंके जाने की जानकारी सामने आई।
अब आगे क्या होगा?
25 जुलाई से शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब बड़े प्रदर्शन में बदल चुका है। छात्रों की मांग है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कथित मामलों की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई की जाए और परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। विधानसभा मार्च के बाद अब सबकी नजर झारखंड सरकार और छात्र संगठनों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर है। सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है और क्या छात्रों की बाकी मांगों पर सहमति बनती है, यह देखना अहम होगा।
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