10 हजार वित्त रहित शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर उपवास रखा. 75% अनुदान वृद्धि, राज्यकर्मी का दर्जा और सेवा शर्त नियमावली की मांग पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया.
रांची. झारखंड राज्य वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर गांधी जयंती के अवसर पर गुरुवार को राज्य के 1250 वित्त रहित शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत करीब 10 हजार शिक्षक-कर्मचारी एक दिवसीय उपवास पर रहे. मोर्चा ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव का कार्यक्रम तय किया था, लेकिन जिला प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के बाद आंदोलन का स्वरूप बदल दिया गया. मोर्चा ने गांधी जी के बताए मार्ग पर चलते हुए शांतिपूर्ण तरीके से उपवास कर अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया. मोर्चा के अनुसार, 30 सितंबर को अध्यक्ष मंडल की बैठक में निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री आवास घेराव की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में शिक्षक-कर्मचारी दो अक्टूबर को उपवास करेंगे. उपवास कार्यक्रम को मोर्चा नेताओं ने पूरी तरह सफल बताते हुए सरकार से लंबित मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की.
75% अनुदान वृद्धि का प्रस्ताव कैबिनेट में रखने की मांग
मोर्चा की प्रमुख मांगों में वित्त रहित संस्थानों के अनुदान में 75 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव जल्द कैबिनेट के समक्ष रखने की मांग शामिल है. मोर्चा का कहना है कि प्रस्ताव पर विधि विभाग और वित्त विभाग की सहमति हो चुकी है. अब इसे कैबिनेट की स्वीकृति के लिए रखा जाना है.
राज्यकर्मी का दर्जा और वेतनमान मोर्चा के अनुसार, इस संबंध में कार्मिक विभाग ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को पत्र भेजा है। मोर्चा ने उस पर आगे की कार्रवाई करने की मांग की है.
सेवा शर्त नियमावली बनाने की मांग
मोर्चा ने इंटरमीडिएट, माध्यमिक, संस्कृत और मदरसा विद्यालयों के शिक्षक-कर्मचारियों के लिए सेवा शर्त नियमावली बनाने की भी मांग की है. इसके अलावा बिहार सरकार से स्थापना अनुमति प्राप्त करीब 150 विद्यालयों को मिलने वाले अनुदान को जारी रखने की मांग की गयी है. मोर्चा का आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में इन विद्यालयों का अनुदान रोकने की तैयारी की जा रही है. मोर्चा ने इन संस्थानों को प्रस्वीकृति लेने के लिए तीन वर्ष का समय देने की मांग की है.
सावित्रीबाई फुले योजना का लाभ देने की मांग
वित्त रहित स्कूल और इंटर कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ फिर से देने की मांग भी की गयी है. मोर्चा का कहना है कि पहले इन संस्थानों के विद्यार्थियों को योजना. का लाभ मिलता था, लेकिन अब इस पर रोक लगी हुई है. मोर्चा ने आंदोलन को बताया सफल
मोर्चा नेताओं रघुनाथ सिंह, अरविंद सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, चंदेश्वर पाठक, फजलुल कादरी अहमद, देवनाथ सिंह, नरोत्तम सिंह, गणेश महतो, संजय कुमार, मनीष कुमार, पशुपति महतो, मनोज तिर्की, विनय उरांव, डालेश चौधरी, बिरसो उरांव, रघु विश्वकर्मा, मनोज कुमार, रणजीत मिश्रा, अनिल तिवारी और मुरारी प्रसाद सिंह ने उपवास कार्यक्रम को सफल बताया. उन्होंने कहा कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन तेज किया जायेगा.
आठ को होगी बैठक, बनेगी आंदोलन की रणनीति आठ अक्टूबर को सर्वोदय बाल निकेतन उच्च विद्यालय, धुर्वा में बैठक बुलायी गयी है. इसमें राज्यभर के वित्त रहित इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालय और मदरसा विद्यालयों के प्राचार्य/प्रधानाचार्य तथा शिक्षक प्रतिनिधि शामिल होंगे. बैठक में मांगों पर आगे की कार्रवाई और आंदोलन के अगले कार्यक्रम की रूपरेखा तय की जायेगी.



