विक्रमशिला सेतु की मरम्मत और पुनर्स्थापन का कार्य शुरू हो गया है, जिसमें स्लैब की दरारों को नोजल से भरा जा रहा है।
भागलपुर। मरम्मत के साथ ही विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन कार्य की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सेतु डेक स्लैब की गड़बड़ियां को ठीक किया जा रहा है।
स्लैब के दरारों में नोजल डालकर ठीक किया जा रहा है। शनिवार को नोजल डालकर तीन स्लैब के दरारों को भरा गया। अभियंता के अनुसार मैटेरियल (नोजल) डालने के बाद मशीन से दरार को अच्छी तरह बंद कर दिया जाता है।
क्योंकि दरार रहने से पानी अंदर घुसेगा तो इससे लोहे में जंग लग सकता है। इसलिए पहले जहां-जहां स्लैब में दरार है उन जगहों में केमिकल डालकर भरा जा रहा है। विशेषज्ञों की जांच में विक्रमशिला सेतु के अंदरूनी हिस्से में एलीगेटर क्रैकिंग है।
जब किसी पुल या सड़क की अस्फाल्ट वाली परत पर जाल जैसी टूट-फूट दिखाई देती है, जो देखने में मगरमच्छ की खाल जैसी लगती है, तो उसे एलीगेट क्रैकिंग कहा जाता है।
यह संकेत देता है कि सड़क व पुल की नींव कमजोर हो रही है। समय पर मरम्मत न हो तो गड्ढे और बड़े टूट-फूट हो सकते हैं। 30 सितंबर की मध्य रात्रि से सेतु को बंद कर दिया जाएगा।
1 अक्टूबर से हटेगा बेली ब्रिज
एक अक्टूबर से बेली ब्रिज हटाने का काम शुरू होगा। बेली ब्रिज हटाने के बाद सेतु पुनर्स्थापन कार्य शुरू होगा। विशेषज्ञ के अनुसार,बियरिंग के ऊपर स्टील गर्डर सेट करने के बाद उसपर 8-10 इंच स्लैब ढालने का काम होगा।
एक स्लैब को ढालने की प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम एक सप्ताह लगेगा। स्लैब को सेट होने में 21 दिन का समय लगेगा। चार स्लैब ढालने का काम होगा। इसलिए इसमें तीन माह का समय लगेगा। इस दौरान सभी बियरिंग और एक्सपेंशन ज्वाइंट भी बदलने का काम होगा।
इधर, सेतु के अंदरूनी हिस्से की गड़बड़ी को ठीक करने के लिए ढक्कन हटाकर कर्मी बाक्स के अंदर प्रवेश कर रहे थे। गड़बड़ी को ठीक कर बाहर निकलने के लिए ढक्कन को हटाना पड़ रहा था।
इसके कारण वाहनों के परिचालन को बार-बार रोकना पड़ रहा था। इसके कारण विक्रमशिला सेतु पर सुबह 10 बजे जाम लग गया। नवगछिया से भागलपुर जीरोमाइल तक गाड़ियों की लंबी लाइनें लग गई। पुल से गुजरने वाले राहगीरों को रात आठ बजे तक जाम से जूझना पड़ा।



