उधवा। प्रखंड क्षेत्र को बाल विवाह मुक्त बनाने के उद्देश्य से सोमवार को उधवा प्रखंड सभागार में सौ दिवसीय “बाल विवाह मुक्त भारत अभियान” के तहत जागरूकता एवं समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी सह प्रभारी सीडीपीओ जयंत कुमार तिवारी ने की, जिसमें प्रखंड की सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं ने भाग लिया। बैठक के दौरान बीडीओ श्री तिवारी ने कहा कि आज भी ग्रामीण अंचलों में सामाजिक कुरीतियों के कारण नाबालिग बच्चों, विशेषकर बालिकाओं का विवाह कर दिया जाता है, जो न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक भविष्य पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाल विवाह एक गंभीर अपराध है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि कानून के अनुसार लड़की की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष तथा लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। इससे कम उम्र में विवाह कराना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। बीडीओ ने आंगनबाड़ी सेविकाओं से अपील की कि वे अपने-अपने पोषक क्षेत्रों में पूरी सतर्कता बरतें और यदि कहीं भी बाल विवाह की आशंका या जानकारी मिले तो तत्काल 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।बैठक में यह भी बताया गया कि बाल मजदूरी भी एक गंभीर अपराध है और 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना कानूनन निषिद्ध है। साथ ही 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है, जिसे हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इस अवसर पर बाल विकास परियोजना की महिला पर्यवेक्षिका सुशीला हेम्ब्रम ने सेविकाओं को बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न कानूनों की जानकारी दी, वहीं मंथन संस्था की सामुदायिक सामाजिक कार्यकर्ता शबनम प्रवीन ने बाल विवाह, मानव तस्करी और बाल श्रम के सामाजिक दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए समुदाय स्तर पर जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। बैठक में उपस्थित आंगनबाड़ी सेविकाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में बाल विवाह रोकथाम को लेकर सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। मौके पर रशीदा बीबी, हलीमा खातून, शबनम बीबी, रेहाना खातून, शांति हेम्ब्रम, सुशीला हांसदा, हाजरा खातून, सोनामुनी बेसरा, रूबीना बीबी, रिंकी देवी, पूर्णिमा देवी सहित बड़ी संख्या में सेविकाएं मौजूद थीं।




