देशभर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए आपदा प्रबंधन और प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण अनिवार्य करने की पहल हुई है. एनडीएमए ने शिक्षा मंत्रालय को भेजा प्रस्ताव.
रांची. देशभर के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक अहम पहल हुई है. स्कूलों में आपदा प्रबंधन और प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया गया है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने झारखंड की सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति शर्मा के सुझावों को आगे की कार्रवाई के लिए शिक्षा मंत्रालय को भेज दिया है. एनडीएमए ने 25 सितंबर 2026 को जारी एक पत्र में यह जानकारी दी थी.
स्कूलों के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन ढांचा
ज्योति शर्मा ने 31 अगस्त को एनडीएमए के अध्यक्ष को भेजे ज्ञापन में स्कूलों के लिए एक राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन ढांचा तैयार करने की मांग की थी. उन्होंने नेपाल में आई भीषण बाढ़ की घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि समय पर सतर्कता और तुरंत सही फैसला लेने से एक स्कूल के करीब 1,600 बच्चों की जान बचाई जा सकी.
भारत में बाढ़, भूकंप, भूस्खलन और आग जैसी आपदाओं के खतरे को देखते हुए स्कूलों की आपदा तैयारी को सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखने की बात कही गई है.
हर स्कूल में इमरजेंसी इवेक्यूएशन प्लान
ज्ञापन में हर सरकारी और निजी स्कूल के लिए स्थानीय आपदा के खतरे के हिसाब से एक ज़रूरी इमरजेंसी इवेक्यूएशन प्लान (आपातकालीन निकास योजना) तैयार करने की मांग की गई है. साथ ही प्रशासन और मौसम विभाग से मिलने वाली शुरुआती चेतावनी को तुरंत स्कूलों तक पहुंचाने की व्यवस्था करने का भी सुझाव दिया गया है.
शिक्षकों और बस चालकों को CPR की ट्रेनिंग
शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ स्कूल बस चालकों को भी सीपीआर, बेसिक लाइफ सपोर्ट, फर्स्ट-एड और एईडी (AED) के इस्तेमाल का प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देने की मांग की गई है. आग, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए साल में कम से कम दो बार मॉक ड्रिल (अभ्यास) कराने और उसकी समीक्षा का भी सुझाव दिया गया है.
छोटे बच्चों और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अलग प्रोटोकॉल
ज्ञापन में छोटे बच्चों और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अलग से सुरक्षित निकासी प्रोटोकॉल (निकास नियम) तैयार करने की मांग की गई है. इसके अलावा जिला स्तर पर स्कूलों की आपदा तैयारियों के सरप्राइज इंस्पेक्शन (आकस्मिक निरीक्षण) और ऑडिट का सुझाव भी दिया गया है.
ज्योति शर्मा ने कहा कि आपदा से पहले तैयारी, समय पर चेतावनी और तेज़ी से सुरक्षित निकास ही बड़ी संख्या में बच्चों की जान बचाने में सबसे अहम हो सकती है. अब शिक्षा मंत्रालय के स्तर पर इन सुझावों पर आगे की कार्रवाई का इंतज़ार है.



