नई दिल्ली | राज्यसभा में गुरुवार को गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्षी सांसदों ने सदन में लगातार “अमित शाह जवाब दो, सदन में आओ” के नारे लगाए और गृह मंत्री से सदन में आकर जवाब देने की मांग की।
विपक्ष की इस मांग पर राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने केंद्र सरकार से सकारात्मक रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू से कहा कि गृह मंत्री तक विपक्ष की भावनाएं पहुंचाई जाएं और उनकी सदन में मौजूदगी की मांग पर विचार किया जाए।
विपक्ष ने क्यों उठाई मांग?
विपक्ष का कहना है कि 20 जुलाई को पेपर लीक के खिलाफ संसद की ओर मार्च कर रहे युवाओं पर सुरक्षा बलों द्वारा की गई कार्रवाई में कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। इसी मुद्दे पर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह से संसद में जवाब चाहता है।
नियमों का हवाला देकर बोले रिजिजू
हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने राज्यसभा के नियम 235 और नियम 240 का हवाला देते हुए विपक्ष से बार-बार एक ही मुद्दा उठाने और व्यवधान पैदा न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार एक ही बात दोहरा रहे हैं, जो सदन की कार्यवाही के अनुरूप नहीं है।
खड़गे का पलटवार
इसके जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उन्हें यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि सदन में क्या बोलना है। उन्होंने कहा कि कब, क्या और कैसे बोलना है, यह तय करना उनका संसदीय अधिकार है।
कार्यवाही हुई स्थगित
हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोबारा कार्यवाही शुरू होने के बाद भी इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस जारी रही।
(नोट: यह खबर संसद में हुई कार्यवाही और विभिन्न पक्षों के बयानों पर आधारित है। आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।)




