झारखंड में बिजली कंपनियों के लिए टैरिफ याचिका समय पर जमा करना अब अनिवार्य है. 30 नवंबर तक याचिका नहीं देने पर जुर्माना और कैरिंग कॉस्ट अस्वीकृत हो सकती है.
रांची. झारखंड में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण कंपनियों के लिए टैरिफ याचिका समय पर दाखिल करना अनिवार्य कर दिया गया है. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (जेएसइआरसी) ने टैरिफ निर्धारण से जुड़े नियमों में संशोधन कर समय सीमा का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है. इसके साथ ही आयोग संबंधित कंपनी की कैरिंग कॉस्ट को अस्वीकार भी कर सकता है. संशोधन से संबंधित आदेश 24 अक्तूबर को झारखंड गजट में प्रकाशित किया गया है.
चार नियमावलियों में किया गया संशोधन
आयोग ने बिजली क्षेत्र से जुड़ी चार नियमावलियों में संशोधन किया है. इनमें बिजली उत्पादन टैरिफ निर्धारण नियमावली, 2025 और ट्रांसमिशन टैरिफ निर्धारण नियमावली, 2025 का पहला संशोधन शामिल है. वहीं, वितरण टैरिफ निर्धारण नियमावली, 2025 और स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (एसएलडीसी) की फीस एवं शुल्क वसूली से संबंधित नियमावली, 2020 में दूसरा संशोधन किया गया है.
नये प्रावधान के दायरे में बिजली उत्पादन कंपनियों, ट्रांसमिशन लाइसेंसधारियों, वितरण लाइसेंसधारियों और एसएलडीसी को शामिल किया गया है. निर्धारित समय सीमा में टैरिफ याचिका दाखिल नहीं करने पर आयोग कैरिंग कॉस्ट देने से इनकार करने के साथ उचित जुर्माना या दंड लगा सकता है.
कार्रवाई से पहले पक्ष रखने का मिलेगा मौका
नियमों के मुताबिक, समय पर याचिका दाखिल नहीं करने के मामले में आयोग संबंधित कंपनी या संस्था के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है. हालांकि, दंडात्मक कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना होगा. संशोधन में जुर्माने की कोई निश्चित राशि निर्धारित नहीं की गयी है. ऐसे में आयोग मामले की परिस्थितियों के आधार पर उचित दंड तय कर सकता है.
बिजली दरों के निर्धारण में समयबद्धता पर जोर
टैरिफ याचिका बिजली कंपनियों के राजस्व और बिजली दरों के निर्धारण की प्रक्रिया का अहम हिस्सा होती है. याचिका दाखिल होने के बाद आयोग संबंधित वित्तीय और परिचालन पहलुओं के आधार पर टैरिफ निर्धारण की प्रक्रिया आगे बढ़ाता है. समय पर याचिका नहीं मिलने से इस प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है.
नये संशोधन के बाद बिजली क्षेत्र की संबंधित कंपनियों और एसएलडीसी को तय समय सीमा का पालन करना होगा. नियमों का उल्लंघन करने पर उन्हें आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है और कैरिंग कॉस्ट का लाभ भी नहीं मिल सकेगा.
30 नवंबर तक दाखिल करनी होती है टैरिफ याचिका
दी गयी जानकारी के अनुसार, बिजली कंपनियों को अगले वित्तीय वर्ष के लिए 30 नवंबर तक टैरिफ याचिका दाखिल करनी होती है. निर्धारित तारीख के बाद याचिका जमा करने पर आयोग के संशोधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है.



