राजमहल के झुमझुमिया काली मंदिर का रहस्य: रेलवे लाइन बिछाते समय मिली मां काली की शिला, जिसे तोड़ने पर निकला खून. यहां आज भी मौजूद हैं गोली के निशान.
राजमहल.राजमहल रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर फाटक के समीप स्थित झुमझुमिया काली मंदिर में ब्रिटिश काल से पूजा-अर्चना होने की मान्यता है. पत्थर के रूप में विराजमान मां काली के दर्शन के लिए यहाँ रोज़ श्रद्धालु पहुँचते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर से जुड़ी एक हैरान करने वाली घटना के बाद यहाँ पूजा की परंपरा शुरू हुई थी.
रेलवे लाइन बिछाने के दौरान मिली थी मां काली की शिला
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, ब्रिटिश काल में खाना जंक्शन से राजमहल रेलवे स्टेशन तक रेलवे लाइन बिछाई जा रही थी. इसी दौरान पटरी के बीच एक विशाल पत्थर (शिला) मिला. मजदूरों ने इस पत्थर को हटाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हुए. इसके बाद एक अंग्रेज अधिकारी के आदेश पर पत्थर को तोड़ने की कोशिश की गयी. बताया जाता है कि जैसे ही पत्थर पर चोट की गई, उसमें से खून निकलने लगा. इसके बाद वहाँ मां काली के स्वरूप की पूजा करने की आवाज सुनाई दी. मान्यता है कि इससे गुस्साए अंग्रेज अधिकारी ने पत्थर पर पिस्तौल से दो गोलियां चला दीं, जिसके बाद उसकी मौके पर ही मौत हो गयी.
पीढ़ियों से हो रही पूजा-अर्चना, आज भी मौजूद हैं गोली के निशान
मंदिर की पुजारिन बेला रानी पांडेय ने बताया कि पहले उनकी मौसी बिनोदा देवी यहाँ पूजा करती थीं. उनके निधन के बाद से वह खुद यहाँ पूजा-अर्चना कर रही हैं. उन्होंने बताया कि उस ऐतिहासिक घटना के कुछ दिनों बाद अंग्रेज अधिकारी के परिजन अपने बच्चों के साथ यहाँ पहुंचे थे और उन्होंने शिला पर चादर चढ़ायी थी. इसके बाद से ही यहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी और पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया. स्थानीय लोगों का दावा है कि शिला पर अंग्रेज अफसर द्वारा चलाई गई गोली के निशान आज भी मौजूद हैं. श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मां काली के दरबार में सच्चे मन से मांगी गयी मन्नत जरूर पूरी होती है. इसी अटूट विश्वास के साथ लोग यहाँ दूर-दूर से पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं.



