फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर गौतम चंद्र दास को बनाया था निशाना, दर्जनों बैंक खाते फ्रीज कर 30 लाख रुपये जब्त: रविकांत साव
पांच हज़ार से अधिक बैंक खातों में साइबर ठगी की रकम भेजे जाने के मिले सुराग
साहिबगंज। बरहड़वा थाना क्षेत्र के गौतम चंद्र दास से डिजिटल हाउस अरेस्ट के नाम पर 1.20 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले का एसआईटी ने खुलासा करते हुए तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। बुधवार को आयोजित प्रेसवार्ता में साइबर सेल के नोडल पदाधिकारी सह मुख्यालय डीएसपी रविकांत साव ने पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित एसआईटी ने बैंक स्टेटमेंट, तकनीकी साक्ष्य और अन्य माध्यमों से जांच को आगे बढ़ाते हुए पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर क्षेत्र से साइबर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। मामले के मुख्य मास्टरमाइंड की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कार्रवाई जारी है।
मामले में गिरफ्तार आरोपितों की पहचान रंजीत बारकी (28), पिता महादेव बारकी, बाघे कॉलोनी, दुर्गापुर, पश्चिम बर्द्धमान; आसित महतो, पिता उत्तम महतो, आईटीआई गोसाई टोला, थाना एनटीपीसी विद्यानगर, पश्चिम बर्द्धमान; तथा धीरज हारी, पिता बैद्यनाथ हारी, हुरको दुर्गापुर, विद्यानगर, पश्चिम बर्द्धमान के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार तीनों आरोपित साइबर ठगी से प्राप्त राशि को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर उसे निकालने का काम करते थे।
फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर किया डिजिटल अरेस्ट:
पुलिस के अनुसार बरहड़वा थाना क्षेत्र निवासी गौतम चंद्र दास को साइबर अपराधियों ने व्हाट्सएप कॉल कर खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। आरोपितों ने पीड़ित को मानसिक भय में डालते हुए उसके खिलाफ सीबीआई में गंभीर मामला दर्ज होने की बात कही। इसके बाद फर्जी केस, अश्लील वीडियो और FIR का डर दिखाकर उसे लगातार धमकाया गया।
साइबर अपराधियों ने पीड़ित को इस कदर भयभीत कर दिया कि वह उनकी बातों में आता चला गया। आरोपितों ने अलग-अलग बहाने बनाकर उससे रकम विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कराई। पुलिस जांच में सामने आया कि कुल दस बार में करीब 1.20 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में भेजे गए।
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उसने यह रकम अपनी पुत्री की शादी के लिए बड़ी मुश्किल से जमा कर रखी थी। साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर उसकी वर्षों की जमा पूंजी ठग ली।
दर्जनों खाते फ्रीज, 30 लाख रुपये जब्त:
मामले की गंभीरता को देखते हुए साहिबगंज के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर सेल के नोडल पदाधिकारी सह मुख्यालय डीएसपी रविकांत साव के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया। टीम ने बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन डिटेल और तकनीकी शाखा की सहायता से पैसों के लेनदेन की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दर्जनों बैंक खातों को फ्रीज कराया और करीब 30 लाख रुपये की राशि जब्त/होल्ड कराने में सफलता हासिल की। साइबर अपराधियों के खातों में भेजी गई रकम की निकासी और ट्रांसफर की गतिविधियों की भी जांच की गई।
जांच टीम में नोडल पदाधिकारी रविकांत साव के साथ पंकज वर्मा, एसआई समेत पुलिस पदाधिकारियों और तकनीकी टीम ने संयुक्त रूप से काम किया।
तीन गिरफ्तार, मास्टरमाइंड की तलाश तेज:
एसआईटी ने बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर क्षेत्र तक जांच का दायरा बढ़ाया। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां कार्रवाई कर तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपित साइबर ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर उसे निकालने में शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया है कि साइबर ठगी का नेटवर्क केवल साहिबगंज तक सीमित नहीं है। पुलिस को देश के अलग-अलग राज्यों में 5,000 से अधिक बैंक खातों में साइबर ठगी की रकम भेजे जाने के सुराग मिले हैं। ऐसे में मामले की जांच का दायरा और बढ़ाया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार तीनों आरोपितों से पूछताछ में मुख्य मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। मास्टरमाइंड की तलाश में पुलिस टीम लगातार छापेमारी और तकनीकी जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उसकी पहचान लगभग हो चुकी है और जल्द ही उसे भी गिरफ्तार किया जाएगा।
20 जून को 50 लाख का पहला ट्रांजेक्शन:
पुलिस जांच में ठगी की रकम के ट्रांजेक्शन का सिलसिला भी सामने आया है। साइबर अपराधियों ने पीड़ित से अलग-अलग तारीखों में रकम ट्रांसफर कराई। इनमें 20 जून 2026 को 50 लाख रुपये का पहला और सबसे बड़ा ट्रांजेक्शन किया गया था। इसके बाद लगातार अलग-अलग खातों में रकम भेजी गई और 24 अगस्त को पांच लाख रुपये का अंतिम ट्रांजेक्शन किया गया।
पुलिस ने साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को खंगालते हुए कार्रवाई की। एसआईटी की जांच में सामने आए अन्य खातों और संदिग्ध लोगों की भी पड़ताल की जा रही है।
डीएसपी रविकांत साव ने आम लोगों से अपील की कि किसी भी व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल पर खुद को सीबीआई, पुलिस या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर डराने पर तत्काल विश्वास न करें। डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं है। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।



