बिजली विभाग की बड़ी गड़बड़ी,साहिबगंज में एक दिहाड़ी मजदूर के नाम ₹89 लाख का बिजली बिल जारी. जानिए कैसे हुई ये चौंकाने वाली चूक और बिल कैसे हुआ शून्य.
साहिबगंज: साहिबगंज जिले के बरहेट प्रखंड में बिजली विभाग की बिलिंग व्यवस्था से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. बरहेट उत्तरी पंचायत के हाई स्कूल रोड के आसपास रहने वाले अबुर बक्कर अंसारी नामक विद्युत उपभोक्ता के नाम पर विभाग की ओर से करीब 89 लाख 13 हजार 347 रुपये (89,13,347) का भारी-भरकम बिजली बिल जारी कर दिया गया. हैरानी की बात यह है कि संबंधित उपभोक्ता एक गरीब दिहाड़ी मजदूर है और प्रतिदिन मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है. ऐसे में एक सामान्य उपभोक्ता के नाम पर इतनी बड़ी रकम का बिजली बिल जारी होना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है.
कनेक्शन काटने पहुंची टीम के उड़े होश, ऐसे सामने आई गड़बड़ी
जानकारी के अनुसार, उपभोक्ता के नाम पर लंबे समय से भारी-भरकम बिजली बिल आ रहा था. मामला उस समय सामने आया जब बिजली विभाग की ओर से एक लाख रुपये से अधिक बकाया रखने वाले उपभोक्ताओं का बिजली कनेक्शन काटने का आदेश जारी किया गया. इसी क्रम में संबंधित उपभोक्ता के बिजली बिल की जांच और कनेक्शन काटने की कार्रवाई के दौरान 89 लाख रुपये की बकाया राशि का मामला सामने आया. इसे देखकर खुद विभागीय टीम हैरान रह गई. इसके बाद मामले की जानकारी तुरंत उच्चाधिकारियों को दी गई. बताया जाता है कि बिजली विभाग को इस गड़बड़ी की जानकारी अक्टूबर में ही मिल गई थी.
मीटर रीडिंग में गलती या सिस्टम फेल: जवाबदेह कौन?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठने लगा है कि आखिर बिजली विभाग की ओर से बिल तैयार करते समय इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई? क्या मीटर रीडिंग के दौरान गलत आंकड़े दर्ज किए गए, बिजली खपत की गणना गलत हुई या फिर बिलिंग सॉफ्टवेयर में किसी तकनीकी त्रुटि के कारण लाखों रुपये की राशि मजदूर के खाते में जुड़ गई? बिजली बिल तैयार करने की प्रक्रिया में मीटर रीडिंग से लेकर आंकड़ों के सत्यापन और बिल जारी करने तक कई चरण होते हैं. ऐसे में इतनी बड़ी राशि दर्ज होने के बावजूद गड़बड़ी का पकड़ में नहीं आना विभागीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
आनन-फानन में बिल हुआ शून्य
जैसे ही यह मामला झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) के उच्च स्तरीय अधिकारियों तक पहुंचा, महकमे में हलचल मच गई. बदनामी से बचने के लिए विभागीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आनन-फानन में संबंधित उपभोक्ता के बिजली बिल की 89 लाख रुपये की राशि को घटाकर शून्य (Zero) कर दिया गया. हालांकि, बिल को शून्य कर देने से विभाग की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती. आम तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार बिजली बिल में मामूली गड़बड़ी होने पर भी सुधार के लिए महीनों विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं होती. ऐसे में एक मजदूर का 89 लाख का बिल बनना पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
साहिबगंज के विद्युत अधीक्षण अभियंता राजकुमार ने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि किसी तकनीकी त्रुटि के कारण बिलिंग दर्ज होने में समस्या आई होगी. विभाग द्वारा इस समस्या का संज्ञान लेते हुए इसका त्वरित समाधान कर लिया गया है.



