नेपाल से आई बाढ़ ने सिकटा में तबाही मचाई है, जिससे सिकटा नदी का सुरक्षा तटबंध टूट गया और त्रिवेणी नहर भी क्षतिग्रस्त हो गई। करीब 50 एकड़ धान की फसल डूब गई है और कई गांवों के निचले हिस्सों में पानी भर गया है।
सिकटा (पश्चिम चंपारण)। नेपाल से आई बाढ़ का पानी सिकटा में तबाही मचाने लगा है। रविवार देर रात सिकटा और माजर नदी के उफनाने से कई गांवों के निचले हिस्सों में पानी फैल गया।
सिकटा नदी के तेज बहाव ने सुरक्षा तटबंध को तोड़ दिया, जिससे खेतों में बाढ़ का पानी फैल गया। करीब 50 एकड़ में लगी धान की फसल डूब गई है।
वहीं, पिछले वर्ष बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुआ त्रिवेणी नहर का तटबंध भी इस बार बाढ़ का दबाव नहीं झेल सका। यहां करीब 60 फीट हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है।
50 फीट सुरक्षा बांध टूटा
सिकटा गांव के उत्तर और घोड़ासहन नहर के अट्ठाइस लाखा पुल के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में सिकटा नदी का सुरक्षा तटबंध करीब 50 फीट तक टूट गया। बांध टूटने के बाद नदी का पानी तेजी से सरेह में फैल गया। खेतों में करीब तीन फीट तक पानी जमा होने से धान की फसल जलमग्न हो गई।
माजर नदी का पानी गांवों में
माजर नदी भी उफान पर है। इसका पानी गौचरी, पुरैनिया और बैशखवा सहित कई गांवों के निचले हिस्से में फैल गया है। खेतों में पानी भरने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। ग्रामीण लगातार बाढ़ का पानी बढ़ने पर नजर बनाए हुए हैं।
60 फीट तटबंध हुआ क्षतिग्रस्त
बीते वर्ष की बाढ़ में क्षतिग्रस्त त्रिवेणी नहर का उत्तरी तटबंध फिर बाढ़ की चपेट में आ गया। करीब 60 फीट हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से सिकटा नदी का पानी नहर में प्रवेश कर गया है। तटबंध से पानी ओवरफ्लो होकर आसपास के क्षेत्रों में बह रहा है।
बोरियों के सहारे छोड़ा गया था तटबंध
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले साल तटबंध टूटने के बाद इसकी आंशिक मरम्मत कराई गई थी। बालू भरी बोरियां डालकर काम छोड़ दिया गया था। इस बार बाढ़ के तेज दबाव में बोरियां बह गईं और तटबंध फिर क्षतिग्रस्त हो गया।
छठियाघाट पर भी खतरा
सिकटा गांव के छठियाघाट के पास पहले से क्षतिग्रस्त सुरक्षा बांध से भी बाढ़ का पानी ओवरफ्लो कर रहा है। वार्ड सदस्य मोतीलाल यादव ने बताया कि आपदा विभाग ने क्षतिग्रस्त तटबंधों की जांच कराई थी, लेकिन मरम्मत नहीं हुई।
बाढ़ उतरने के बाद होगी मरम्मत
अंचलाधिकारी कुमार राजीव रंजन ने बताया कि क्षतिग्रस्त स्थलों का निरीक्षण किया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग को इसकी सूचना दी गई है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद तटबंधों की मरम्मत कराई जाएगी।



