हथियारों से लैस रहने वाले नक्सलियों के खिलाफ अभियान में सुरक्षा बलों ने उनकी असल ताकत पर प्रहार किया है.
रांची: किसी भी प्रतिबंधित संगठन की सबसे बड़ी ताकत उसका हथियारबंद नेटवर्क होता है. झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चले लंबे अभियान में सुरक्षा बलों ने इसी ताकत पर प्रहार किया है. हालात ये हो गए हैं कि कभी पुलिस बलों से लूटे गए हथियारों से लैस रहने वाले न नक्सली बचे हैं और न ही हथियार.
AK- 47 जैसे घातक हथियार
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 2000 से अगस्त 2026 तक झारखंड में नक्सलियों से 682 हथियार बरामद किए गए हैं. बरामद हथियारों में 93 एके-47, 10 एलएमजी, 111 इंसास, 123 एसएलआर, 247 .303 राइफल और 28 कार्बाइन शामिल हैं. इसके अलावा 70 अन्य हथियार भी बरामद किए गए हैं, यानी सुरक्षा बलों ने सिर्फ नक्सलियों के दस्तों को कमजोर नहीं किया है, बल्कि उनके हथियारों के बड़े नेटवर्क पर भी लगातार प्रहार किया है.
2000 से 2004 तक एक भी हथियार बरामद नहीं
झारखंड में नक्सलवाद के सबसे कठिन दौर में 2000 से 2004 तक पुलिस रिकॉर्ड में नक्सलियों से एक भी हथियार बरामद नहीं हुआ है. इसके बाद सुरक्षा बलों ने रणनीति बदली और अभियान को लगातार मजबूत किया. 2005 में पहली बार तीन हथियार बरामद हुए. इसके बाद बरामदगी का सिलसिला बढ़ता गया. 2007 और 2008 में 43-43 हथियार बरामद किए गए. 2018 में यह आंकड़ा 45 तक पहुंचा, जबकि 2022 में एक साल में रिकॉर्ड 59 हथियार बरामद हुए.
नक्सलियों के पास से बरामद हथियार कितने खतरनाक

- एके47- सबसे चर्चित और खतरनाक असॉल्ट राइफलों में शामिल:
तेज फायरिंग क्षमता वाली एके47 लंबे समय से दुनिया भर में सशस्त्र संगठनों के बीच चर्चित रही है. झारखंड में 2000 से अगस्त 2026 तक 93 एके 47 बरामद की गई हैं. अकेले 2026 में अगस्त तक 15 एके 47 बरामद होने का रिकॉर्ड है.
- एलएमजी- लगातार फायरिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण
लाइट मशीन गन का इस्तेमाल सामान्य तौर पर लंबे समय तक लगातार फायरिंग और किसी क्षेत्र में फायर सपोर्ट देने के लिए किया जाता है, इसलिए किसी उग्रवादी दस्ते के पास एलएमजी की मौजूदगी उसकी हथियार क्षमता को बढ़ाती है. झारखंड में 26 सालों में 10 एलएमजी बरामद हुई हैं. 2026 में अगस्त तक एक एलएमजी बरामद की गई है.
- इंसास- सुरक्षा बलों के इस्तेमाल वाला अहम हथियार
इंसास राइफल भारतीय सुरक्षा बलों के साथ लंबे समय तक सेवा में रही है. आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में 111 इंसास बरामद हुई हैं, जो AK-47 के बाद सूची में बड़ी संख्या है. 2026 में अगस्त तक 17 इंसास बरामद हुई.
- SLR- पुरानी लेकिन प्रभावी सर्विस राइफल
एसएलआर लंबे समय तक भारतीय सुरक्षा बलों की प्रमुख राइफलों में रही है. इसकी मारक क्षमता और मजबूत डिजाइन के कारण यह भी नक्सली दस्तों के लिए महत्वपूर्ण हथियार रहा है. झारखंड में 123 एसएलआर बरामद हुई हैं.कार्बाइन- हल्का और नजदीकी मुकाबले में उपयोगी
कार्बाइन आमतौर पर राइफल की तुलना में अधिक कॉम्पैक्ट हथियार होती है और नजदीकी दूरी की परिस्थितियों में उपयोग के लिए उपयुक्त मानी जाती है. झारखंड में 28 कार्बाइन बरामद की गई हैं.
- पॉइंट 303 राइफल, संख्या सबसे ज्यादा
बरामद हथियारों में संख्या के लिहाज से .303 सबसे आगे है. 2000 से अगस्त 2026 तक 247 .303 राइफल बरामद हुई हैं, यह पूरी सूची में किसी एक हथियार की सबसे बड़ी संख्या है.
हथियार सबसे बड़ी ताकत उसे ही किया गया टारगेट
झारखंड पुलिस के आईजी अभियान नरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि झारखंड से नक्सलवाद लगभग खत्म हो गया है, नक्सलियों को कमजोर करने में उनके हथियारों की जब्ती एक बड़ी वजह है. नक्सलियों द्वारा पुलिस और केंद्रीय बलों के हथियारों की लूट कई बार की गई थी, लेकिन अब पुलिस से लुटे गए 99.9% हथियार बरामद किए जा चुके है. पुलिस के हथियार नक्सलियों से वापस लिए जा चुके हैं. यह हथियार नक्सलियों के आत्मसमर्पण एनकाउंटर और गिरफ्तारी के बाद बरामद किए गए हैं.पने हथियार भी नहीं बचा पाए नक्सली
26 सालों में सुरक्षा बलों के लगातार आक्रामक अभियान का असर नक्सलियों के पास से बरामद हथियारों के जखीरे को देखकर ही पता चल जाता है. सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के बीच नक्सलियों को अपने कैंप और बंकर छोड़कर जंगलों में पीछे हटना पड़ा. इसी दौरान कई जगहों पर जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए हथियार लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं हो सके और जंग लगने से बेकार हो गए.वहीं जंगलों में चलाए जा रहे सर्च अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को ऐसे कई हथियार मिले हैं, जिन्हें नक्सलियों ने जमीन के नीचे या सुनसान जगहों पर छिपाकर रखा था. लंबे समय तक खुले वातावरण और नमी के संपर्क में रहने के कारण इनमें भारी जंग लग गई। इनमें से कई हथियार अब इस्तेमाल के लायक नहीं बचे हैं



