मृत डॉल्फिन के शव प्रबंधन से लेकर जाल में फंसी डॉल्फिन के सुरक्षित बचाव का दिया प्रशिक्षण
साहिबगंज। संवाददाता। गंगा नदी में पाई जाने वाली गंगा डॉल्फिन के संरक्षण, सुरक्षा एवं वैज्ञानिक निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से शनिवार को डॉल्फिन व्याख्या केंद्र, चानन में वन प्रमंडल साहिबगंज की ओर से एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें डॉल्फिन निगरानीकर्ताओं और वन विभाग के फील्ड कर्मियों को संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
कार्यशाला में डॉल्फिन संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. नचिकेत केलकर, आशुतोष कुमार एवं सौमेन बक्शी ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रबल गर्ग ने नियमित निगरानी, वैज्ञानिक आंकड़ों के संकलन और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई पर जोर दिया।
मृत डॉल्फिन के नमूने सुरक्षित रखने की जानकारी :
विशेषज्ञों ने मृत डॉल्फिन मिलने पर उसके शव को वैज्ञानिक तरीके से संभालने तथा आवश्यक ऊतक नमूनों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया बताई। इससे डॉल्फिन की मृत्यु के संभावित कारणों और स्वास्थ्य संबंधी अध्ययन में मदद मिलेगी।
जाल में फंसने पर सुरक्षित बचाव का दिया प्रशिक्षण:
मछली पकड़ने के जाल में डॉल्फिन के फंसने की स्थिति में उसे सुरक्षित निकालने और आवश्यक पुनर्वास प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई। साथ ही डॉल्फिन के व्यवहार, गतिविधि और स्थान का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अभयारण्य, भागलपुर के विशेषज्ञों के अनुभव भी साझा किए गए। मौके पर वनपाल राणा रंजीत, प्रधान वनरक्षी अंकित झा, प्रेम कुमार, पप्पू कुमार सहित डॉल्फिन निगरानीकर्ता एवं वनकर्मी मौजूद रहे।



