ग्रामीणों ने लगाया अनियमितता का आरोप, कनीय अभियंता बोले—माप कम होने पर दूसरे स्थान पर कराई गई PCC ढलाई
साहिबगंज: जिले के उधवा प्रखंड की उत्तर पियारपुर पंचायत अंतर्गत पियारपुर बाजार के समीप जिला परिषद निधि से कराए जा रहे PCC सड़क निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने अनियमितता के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि स्वीकृत योजना के तहत करीब 300 फीट लंबी PCC सड़क का निर्माण होना था, जबकि मौके पर लगभग 200 फीट हिस्से में ही ढलाई दिखाई दे रही है। इसी को लेकर योजना की मापी, कार्य की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पियारपुर बाजार के समीप जियाउर के घर से जैनुल के घर तक PCC सड़क निर्माण के लिए जिला परिषद निधि से योजना स्वीकृत की गई है। स्थल पर लगे सूचना पट्ट के मुताबिक यह कार्य जिला परिषद योजना के तहत निविदा संख्या 09/25-26 के माध्यम से कराया जा रहा है। योजना की प्राक्कलित राशि करीब 7.16 लाख रुपये बताई गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क की PCC ढलाई कुछ दिन पहले कराई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना में सड़क की लंबाई करीब 300 फीट निर्धारित है, लेकिन स्वीकृत स्थल पर लगभग 200 फीट ही PCC ढलाई दिखाई दे रही है। करीब 100 फीट कम ढलाई को लेकर अब योजना के क्रियान्वयन और मापी प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
कनीय अभियंता और संवेदक की मिलीभगत का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि योजना से जुड़े कनीय अभियंता और संवेदक की मिलीभगत से कम लंबाई में सड़क निर्माण कर पूरी स्वीकृत लंबाई की राशि की निकासी की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
योजना की मेजरमेंट बुक (MB) और फाइनल बिल से संबंधित जानकारी को लेकर विभागीय कनीय अभियंता दिलीप कुमार से जानकारी लेने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि टेंडर और सूचना पट्ट में दर्ज लंबाई की तुलना में स्थल पर करीब 100 फीट कम सड़क की ढलाई हुई है।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि योजना की वास्तविक लंबाई की दोबारा मापी कराई जाए और MB में दर्ज माप का मौके पर हुए निर्माण से मिलान किया जाए।
कनीय अभियंता ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, मामले में विभागीय कनीय अभियंता दिलीप कुमार ने ग्रामीणों के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि योजना स्थल की लंबाई की माप करने के बाद वहां निर्धारित लंबाई कम पाई गई थी। इसी वजह से शेष लंबाई की PCC ढलाई दूसरे स्थान पर कराई गई है।
कनीय अभियंता के अनुसार, योजना की पूरी निर्धारित लंबाई के अनुसार कार्य कराया गया है और कम निर्माण किए जाने का आरोप सही नहीं है।
हालांकि, इस स्पष्टीकरण के बाद भी ग्रामीणों का सवाल है कि यदि मूल योजनास्थल पर स्वीकृत लंबाई कम पाई गई थी, तो दूसरे स्थान पर कराई गई PCC ढलाई का प्रावधान स्वीकृत नक्शे, प्राक्कलन और तकनीकी स्वीकृति में किस तरह किया गया। इसी बिंदु को लेकर ग्रामीणों ने विभाग से दस्तावेजों और स्थल की जांच कराने की मांग की है।
स्थल निरीक्षण और MB जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला परिषद विभाग से पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। उनकी मांग है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की वास्तविक लंबाई की मापी करें, मेजरमेंट बुक (MB), स्वीकृत प्राक्कलन, तकनीकी स्वीकृति और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच करें।
अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि स्वीकृत योजना के अनुरूप सड़क का निर्माण हुआ है या निर्माण की लंबाई और भुगतान को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।



