रांची। कांटाटोली स्थित खादगढ़ा बस स्टैंड की बंदोबस्ती को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। नगर आयुक्त सुशांत गौरव द्वारा सात सितंबर को निविदा स्थगित कर दिए जाने और इस अवधि में नगर निगम स्तर से विभागीय वसूली कराने का स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद पुराने संवेदक द्वारा बसों से शुल्क वसूली किए जाने का मामला सामने आया है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब नगर आयुक्त ने टेंडर स्थगित कर विभागीय वसूली का आदेश दे दिया है, तो इसके बावजूद पुराने संवेदक को बस स्टैंड में शुल्क वसूलने की अनुमति किसने दी। वसूली की जा रही राशि नगर निगम के खाते में जमा हो रही है या कहीं और, यह भी जांच का विषय है। टेंडर स्थगित, विभागीय वसूली का था आदेश
कांटाटोली खादगढ़ा बस स्टैंड की बंदोबस्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों के बाद रांची नगर निगम के नगर आयुक्त ने सात सितंबर 2026 को निविदा प्रक्रिया स्थगित करने का आदेश दिया था। जांच पूरी होने और आगे की कार्रवाई होने तक बस स्टैंड की वसूली निगम के स्तर से विभागीय रूप से किए जाने का निर्देश दिया गया था। बाद में मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की गई। जांच समिति में अपर नगर आयुक्त संजय कुमार, कार्यपालक अभियंता संजीव कुमार, सहायक नगर आयुक्त निहारिका तिर्की, सहायक नगर आयुक्त मुकेश रंजन और प्रोग्रामर राजेश कुमार को शामिल किया गया है। समिति को पूरी निविदा प्रक्रिया की जांच कर संयुक्त जांच प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश दिया गया है। टेंडर का संचालन करने वाली एजेंसी एमएसटीसी से भी स्पष्टीकरण मांगा जाना है।
आदेश के करीब दो सप्ताह बाद भी जारी है वसूली
नगर आयुक्त के आदेश के करीब दो सप्ताह बाद 19 सितंबर को पुराने संवेदक द्वारा बसों से शुल्क वसूले जाने की पर्ची सामने आना पूरे मामले को और गंभीर बना रहा है। सवाल यह है कि जब निगम ने खुद वसूली करने का निर्णय लिया था, तब पुराने संवेदक के पास शुल्क वसूलने की पर्चियां कहां से आईं और उसे वसूली की अनुमति किसने दी।
7.50 करोड़ की बोली से शुरू हुआ विवाद
खादगढ़ा बस स्टैंड की बंदोबस्ती का विवाद पहली आनलाइन निविदा से शुरू हुआ था। आठ अगस्त को हुई पहली आनलाइन बोली में अधिकतम बोली करीब 7.50 करोड़ रुपये तक पहुंची थी। इसके बाद पूरी प्रक्रिया को रद कर दिया गया। बाद में एक सितंबर को दोबारा आनलाइन बोली कराई गई, जिसमें अधिकतम बोली 3 करोड़ 20 लाख 80 हजार रुपये तक ही पहुंची। दोनों बोलियों में करीब 4.29 करोड़ रुपये का अंतर रहा।
पहली बोली में आहाब इंटरप्राइजेज ने करीब 7.50 करोड़ रुपये की बोली लगाकर एल-1 स्थान हासिल किया था। दूसरी प्रक्रिया में बंदोबस्ती रिजर्व प्राइस से महज करीब 80 हजार रुपये अधिक पर पूरी होने की बात सामने आई थी। इस बड़े अंतर को लेकर मेयर रोशनी खलखो ने भी सवाल उठाए थे।



