दूरस्थ शिक्षा से प्राप्त बीटेक डिग्री के आधार पर NHAI अधिकारी का प्रमोशन रद्द. झारखंड हाईकोर्ट ने कैट के आदेश को खारिज करते हुए NHAI के रिवर्जन आदेश को बहाल किया.
झारखंड हाइकोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को राहत देते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की रांची सर्किट बेंच के छह फरवरी 2025 के आदेश को रद्द कर दिया है. कैट ने पूर्ण चंद्र कहिली को डिप्टी जनरल मैनेजर (तकनीकी) के पद पर बहाल करने और सेवा संबंधी लाभ देने का निर्देश दिया था. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने एनएचएआई के 27 जून 2024 के रिवर्जन आदेश को बहाल कर दिया. इस आदेश के तहत श्री कहिली को डिप्टी जीएम के पद से टेक्निकल असिस्टेंट के पद पर भेजा गया था.
दूरस्थ शिक्षा की बीटेक डिग्री पर मिली थी पदोन्नति
खंडपीठ ने कहा कि पूर्ण चंद्र कहिली को मिली पदोन्नति दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से प्राप्त बीटेक डिग्री पर आधारित थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत ऐसी इंजीनियरिंग डिग्री को अमान्य माना जा चुका है. इसलिए इस डिग्री के आधार पर मिली पदोन्नति का लाभ जारी नहीं रखा जा सकता. हाइकोर्ट ने कहा कि एनएचएआई के 1996 के भर्ती नियम और 2011 के विज्ञापन में मैनेजर (टेक्निकल) के पद के लिए सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री अनिवार्य थी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुभव शैक्षणिक योग्यता का विकल्प नहीं हो सकता. 1997 में ड्राफ्ट्समैन के पद पर हुई थी नियुक्ति
पूर्वी सिंहभूम निवासी पूर्ण चंद्र कहिली की वर्ष 1997 में एनएचएआई में ड्राफ्ट्समैन के पद पर नियुक्ति हुई थी. बाद में इस पद का नाम टेक्निकल असिस्टेंट कर दिया गया. उन्होंने सेवा के दौरान सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया. इसके बाद 2008-11 सत्र में राजस्थान विद्यापीठ से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से बीटेक की डिग्री हासिल की. इसी डिग्री के आधार पर वर्ष 2012 में उन्हें मैनेजर (टेक्निकल) और वर्ष 2016 में डिप्टी जनरल मैनेजर के पद पर पदोन्नति दी गई थी.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनएचएआई ने की थी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने ओड़िशा लिफ्ट इरिगेशन कॉरपोरेशन मामले में दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से प्राप्त इंजीनियरिंग डिग्रियों को अमान्य माना था. साथ ही ऐसी डिग्री के आधार पर मिले पदोन्नति और अन्य सेवा लाभ वापस लेने का निर्देश दिया था. इसके बाद एनएचएआई ने वर्ष 2021 में पूर्ण चंद्र कहिली को डिप्टी जीएम के पद से टेक्निकल असिस्टेंट के पद पर रिवर्ट कर दिया था. हाइकोर्ट ने बिना सुनवाई कार्रवाई किए जाने के कारण उस आदेश को रद्द कर एनएचएआइ को दोबारा निर्णय लेने का निर्देश दिया था इसके बाद एनएचएआइ ने 27 जून 2024 को फिर से रिवर्जन का आदेश जारी किया. कहिली ने इस आदेश को कैट में चुनौती दी. कैट की रांची सर्किट बेंच ने छह फरवरी 2025 को एनएचएआई के आदेश को रद्द करते हुए उन्हें डिप्टी जीएम के पद पर बहाल करने और सेवा लाभ देने का निर्देश दिया था. अब हाइकोर्ट की खंडपीठ ने कैट के इस आदेश को रद्द करते हुए एनएचएआई के 27 जून 2024 के रिवर्जन आदेश को बहाल कर दिया है.



