झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था पर चिंता जताई है. कोर्ट ने शहर के बीच स्थित बस स्टैंड को शहर की सीमा से बाहर बाईपास के समीप स्थानांतरित करने के सुझाव पर गंभीरता से विचार करने का निर्देश दिया है.
Jharkhand High Court: झारखंड हाइकोर्ट ने हजारीबाग शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासन को यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए गंभीरता से कदम उठाने का निर्देश दिया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान शहर के बीच स्थित बस स्टैंड को शहर की सीमा से बाहर बाईपास के समीप स्थानांतरित करने के सुझाव पर भी गंभीरता से विचार किया.
शहर में बस स्टैंड रहने से यातायात पर अतिरिक्त दबाव
खंडपीठ ने कहा कि हजारीबाग में बाईपास हाईवे का निर्माण हो चुका है. ऐसे में शहर के बीचोंबीच बस स्टैंड के रहने से यातायात पर अतिरिक्त दबाव पड़ना स्वाभाविक है. यदि बस स्टैंड को शहर से बाहर बाईपास के समीप स्थानांतरित किया जाता है, तो इससे शहर के अंदर वाहनों का दबाव कम करने और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाने में मदद मिल सकती है.
उच्चस्तरीय बैठक कर बस स्टैंड पर निर्णय लेने का निर्देश
हाइकोर्ट ने हजारीबाग प्रशासन को निर्देश दिया कि बस स्टैंड को शहर से बाहर बाईपास के निकट स्थानांतरित करने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाये. प्रशासन को इस संबंध में व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है. खंडपीठ ने प्रार्थी की ओर से प्रस्तुत सिनॉप्सिस में ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए दिये गये सुझावों पर भी गंभीरतापूर्वक विचार करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि इस दिशा में की गयी कार्रवाई और प्रस्तावित कदमों की जानकारी देते हुए 15 दिनों के भीतर शपथ पत्र दाखिल किया जाये.
अतिक्रमण हटाने में कार्रवाई नहीं होने का आरोप
सुनवाई के दौरान प्रार्थी अधिवक्ता अच्युत स्वरूप मिश्रा स्वयं अदालत में उपस्थित हुए. उन्होंने खंडपीठ को हजारीबाग की मौजूदा ट्रैफिक व्यवस्था और प्रशासन की ओर से अब तक उठाये गये कदमों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पूर्व में हाइकोर्ट द्वारा दिये गये निर्देशों के बावजूद शहर में ट्रैफिक लाइट सिग्नल लगाने और सड़क किनारे किये गये अतिक्रमण को हटाने की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है. इसके कारण हजारीबाग शहर में प्रतिदिन जाम की स्थिति बनी रहती है.
शहर के कई प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण
शहर के कई प्रमुख मार्गों पर सड़क किनारे अतिक्रमण के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है. प्रार्थी की ओर से अदालत में प्रस्तुत सिनॉप्सिस में हजारीबाग की ट्रैफिक व्यवस्था से जुड़ी विभिन्न समस्याओं, संबंधित कानूनों और प्रावधानों, प्रशासनिक कमियों तथा यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुझावों का विस्तार से उल्लेख किया गया है.
पुलिस पर दुर्व्यवहार का भी लगाया आरोप
सुनवाई के दौरान प्रार्थी ने हजारीबाग पुलिस प्रशासन पर उनके साथ कथित दुर्व्यवहार किये जाने का आरोप भी लगाया. उन्होंने खंडपीठ को बताया कि जनहित याचिका दायर किये जाने के बाद से पुलिस प्रशासन की ओर से उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया जा रहा है. प्रार्थी ने बताया कि कोर्रा थाना प्रभारी को एक संज्ञेय अपराध के संबंध में करीब एक माह पूर्व लिखित शिकायत दी गयी थी, लेकिन अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी है. इस मामले को अदालत के समक्ष रखते हुए उन्होंने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाया.
उत्पीड़न हुआ तो कोर्ट गंभीरता से लेगी मामला
प्रार्थी की शिकायत पर खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे हजारीबाग पुलिस प्रशासन को स्पष्ट रूप से अवगत करायें कि भविष्य में यदि प्रार्थी अधिवक्ता को किसी प्रकार का उत्पीड़न या प्रताड़ना होती है, तो अदालत इस मामले को गंभीरता से लेगी. अदालत के निर्देश के बाद अब हजारीबाग प्रशासन के सामने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर ठोस कार्रवाई करने की चुनौती है. खासकर बस स्टैंड को बाईपास के पास स्थानांतरित करने का प्रस्ताव शहर के यातायात दबाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, बस स्टैंड स्थानांतरण की व्यवहारिकता, यात्रियों की सुविधा और परिवहन व्यवस्था को लेकर प्रशासन को विस्तृत स्तर पर विचार करना होगा.




