सावन की अंतिम सोमवारी पर हरिलाजोड़ी मंदिर में उमड़ी भीड़. रावण, विष्णु और शिवलिंग की कथा जानें. देवघर का पवित्र दर्शन.
देवघर : सावन की अंतिम सोमवारी पर हरिलाजोड़ी मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. मंदिर का पट सुबह पांच बजे खुलते ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया. सुबह आठ बजे तक मंदिर परिसर में भीड़ काफी बढ़ गई. श्रद्धालुओं को कतारबद्ध कर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कराई गई.
सावन के प्रत्येक सोमवार को हरिलाजोड़ी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है. श्रावणी मेला के दौरान कांवरियों के साथ-साथ स्थानीय देवघरवासी भी यहां पहुंचकर बाबा भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं.

रावण से शिवलिंग लेकर विष्णु ने कर दिया था स्थापित
हरिलाजोड़ी मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता भी काफी प्रसिद्ध है. मान्यता है कि लंकापति रावण जब कैलाश से वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग लेकर लंका जा रहे थे, उसी दौरान हरिलाजोड़ी के पास उन्हें लघुशंका की इच्छा हुई. भगवान विष्णु चरवाहे का रूप धारण कर वहां पहुंचे. रावण ने शिवलिंग उन्हें सौंप दिया और लघुशंका के लिए चले गए. इसी दौरान भगवान विष्णु ने शिवलिंग को बाबा बैद्यनाथ मंदिर में स्थापित कर दिया.
लौटने के बाद रावण ने शिवलिंग को उठाने का प्रयास किया, लेकिन वह उसे उठा नहीं सके. मान्यता है कि हरिलाजोड़ी में आज भी भगवान विष्णु के पदचिह्न मौजूद हैं. श्रद्धालु इन पदचिह्नों की भी पूजा-अर्चना करते हैं.



