बिहार भाजपा ने सीमांचल और कोसी क्षेत्र में संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने के लिए नए संगठक अनंत नारायण मिश्र को मैदान में उतारा है।
पटना। बिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अब सीमांचल और कोसी की सियासत पर संगठनात्मक फोकस बढ़ा दिया है।
भागलपुर, पूर्णिया और कोसी क्षेत्र में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए पार्टी ने नवनियुक्त संगठक अनंत नारायण मिश्र को मैदान में उतारा है।
बिहार पहुंचने के बाद वह प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के साथ इन इलाकों का दौरा करेंगे। इस दौरान पार्टी संगठन की जमीनी स्थिति के साथ स्थानीय राजनीतिक-सामाजिक परिस्थितियों को भी समझने की कोशिश करेगी।
सीमांचल-कोसी में बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की तैयारी
भाजपा के लिए सीमांचल और कोसी क्षेत्र लंबे समय से संगठनात्मक विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण रहे हैं। पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज और आसपास के क्षेत्रों में पार्टी अपनी सांगठनिक गतिविधियों को और सक्रिय करने पर जोर दे रही है।
वहीं, कोसी क्षेत्र में भी मंडल से लेकर बूथ स्तर तक संगठन की सक्रियता बढ़ाने की तैयारी है। इसी कड़ी में अनंत नारायण मिश्र को इन क्षेत्रों की संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने की जिम्मेदारी दी गई है।
उनके दौरे का मुख्य फोकस संगठन की जमीनी पकड़, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बूथ स्तर की तैयारियों पर रहेगा।
जिलाध्यक्षों से लेकर मंडल अध्यक्षों तक के साथ बैठक
प्रस्तावित दौरे के दौरान जिलाध्यक्षों, जिला पदाधिकारियों, मंडल अध्यक्षों और प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें होंगी। इन बैठकों में बूथ स्तर पर संगठन की स्थिति, लंबित सांगठनिक कार्यों और पार्टी के आगामी कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, स्थानीय कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद के जरिए क्षेत्र की मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों की जानकारी भी ली जाएगी। इसके आधार पर संगठन को और सक्रिय करने की रणनीति पर चर्चा होगी।
सीमांचल की स्थानीय सियासत और सामाजिक समीकरण पर नजर
भाजपा के इस अभियान में संगठन के साथ स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को समझना भी अहम हिस्सा होगा।
सीमांचल में अलग-अलग जिलों की सामाजिक संरचना और स्थानीय मुद्दों की अपनी अलग प्रकृति है। ऐसे में प्रदेश नेतृत्व के साथ नए संगठक का दौरा स्थानीय स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को समझने और उन्हें गति देने का माध्यम होगा।
पूर्णिया और आसपास के इलाके सीमांचल की राजनीति में प्रमुख भूमिका रखते हैं, जबकि कोसी क्षेत्र का अपना अलग राजनीतिक प्रभाव है।
भागलपुर को भी इस सांगठनिक क्षेत्र में शामिल किए जाने से पार्टी का फोकस एक बड़े भूभाग पर संगठनात्मक समन्वय मजबूत करने का है।
सीमांचल और कोसी में भाजपा की जमीनी गतिविधियां कितनी तेज होती हैं और स्थानीय स्तर पर संगठन को किस तरह विस्तार दिया जाता है, इस पर अब पार्टी का विशेष फोकस रहेगा।
सीमांचल व कोसी में भाजपा की चुनौती
बिहार में सत्ता की राजनीति में मजबूत स्थिति के बावजूद सीमांचल और कोसी भाजपा के लिए अलग तरह की राजनीतिक चुनौती हैं।
सीमांचल के पूर्णिया, कटिहार, अररिया एवं किशनगंज तथा कोसी के सहरसा, सुपौल और मधेपुरा में सामाजिक समीकरण, स्थानीय नेतृत्व और क्षेत्रीय मुद्दे चुनावी राजनीति को प्रभावित करते हैं।
सीमांचल में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने संगठनात्मक आधार को व्यापक बनाने की है। इस क्षेत्र में अल्पसंख्यक आबादी की बड़ी हिस्सेदारी है।
AIMIM के चुनाव दर चुनाव मजबूत होने से भाजपा के लिए अपने परंपरागत समर्थक वर्ग के साथ-साथ पिछड़े, अतिपिछड़े और युवा मतदाताओं तक लगातार पहुंच बनाए रखना अहम है। ओवैसी फैक्टर की भी चुनौती है।
संगठन की दृष्टि से भाजपा ने इस क्षेत्र पर विशेष फोकस बढ़ाया है। आगामी दौर में बूथ स्तर तक संगठन की मजबूती और स्थानीय नेतृत्व को उभारना इस क्षेत्र में पार्टी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।



