विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के बीच, अररिया के तीन श्रद्धालु विश्व कल्याण और राष्ट्र की उन्नति के लिए कठिन दंडवत यात्रा पर निकले हैं. उनकी अटूट आस्था और समर्पण स्थानीय लोगों को भी प्रेरित कर रहा है.
Munger News: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के दौरान जहां लाखों कांवरिये पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा कर रहे हैं, वहीं अररिया जिले के तीन श्रद्धालु ऐसी कठिन साधना में जुटे हैं, जिसे देखकर लोग भावुक हो रहे हैं. संतोष झा, भावेश चौधरी और रिकेश यादव विश्व कल्याण और राष्ट्र की उन्नति की कामना लेकर दंड प्रणाम (दंडवत यात्रा) करते हुए देवघर की ओर बढ़ रहे हैं. बुधवार को यात्रा के नौवें दिन जब वे मुंगेर जिले के तारापुर प्रखंड स्थित छत्रहार मोड़ पहुंचे, तो उनकी तपस्या और समर्पण ने स्थानीय लोगों को भी नतमस्तक कर दिया.
हर दंड के साथ आगे बढ़ रही आस्था
दंडवत यात्रा सामान्य पैदल यात्रा नहीं होती. श्रद्धालु हर कुछ कदम पर पूर्ण दंड प्रणाम करते हैं और उसी प्रकार आगे बढ़ते हैं.
यही कारण है कि यह यात्रा शारीरिक रूप से अत्यंत कठिन मानी जाती है और इसे पूरा करने में कई सप्ताह लग जाते हैं.
तीनों दंडी बम लगातार इसी संकल्प के साथ बाबा धाम की ओर बढ़ रहे हैं.
तीन पीढ़ियों जैसी आस्था की कहानी
तीनों श्रद्धालुओं की यात्राएं अलग-अलग अनुभवों से जुड़ी हैं.
संतोष झा, जो सबसे वरिष्ठ श्रद्धालु हैं, चौथी बार दंडवत यात्रा कर रहे हैं.
भावेश चौधरी की यह दूसरी यात्रा है, जबकि रिकेश यादव पहली बार इस कठिन साधना में शामिल हुए हैं.
तीनों का कहना है कि उनकी यात्रा किसी व्यक्तिगत मन्नत के लिए नहीं, बल्कि विश्व कल्याण और राष्ट्र की उन्नति के लिए है.
35 से 36 दिनों में बाबा धाम पहुंचने का संकल्प
श्रद्धालुओं ने बताया कि उनका लक्ष्य 35 से 36 दिनों के भीतर देवघर पहुंचकर बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करना है.
हालांकि वे मानते हैं कि अंतिम निर्णय बाबा की कृपा पर निर्भर करता है और वही उन्हें सुरक्षित रूप से यात्रा पूरी कराएंगे.
तारापुर में मिला आत्मीय सहयोग
छत्रहार मोड़ स्थित अस्थायी स्वास्थ्य शिविर में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों ने तीनों दंडी बमों की सेवा की.
एएनएम प्रतिमा और प्रियंका ने उनके थके और छिले हुए पैरों में स्वयं तेल और मरहम लगाया, जिससे उन्हें काफी राहत मिली.
स्थानीय लोगों ने भी श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया और उनकी यात्रा की सफलता की कामना की.
कठिन साधना, लेकिन अटूट विश्वास
दंडवत यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के पैरों में छाले पड़ जाते हैं, शरीर थक जाता है और यात्रा की गति बेहद धीमी हो जाती है.
इसके बावजूद संतोष, भावेश और रिकेश लगातार आगे बढ़ रहे हैं.
उनका कहना है कि बाबा के प्रति विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है.
Munger News: श्रावणी मेला में आस्था का अनोखा दृश्य
श्रावणी मेला हर वर्ष देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं का केंद्र बनता है.
लेकिन दंडवत यात्रा करने वाले श्रद्धालु अपनी कठिन साधना और समर्पण के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं.
तारापुर में तीनों दंडी बमों की यात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आस्था जब संकल्प बन जाती है, तो दूरी, थकान और कठिनाई भी छोटी पड़ जाती है.




