उद्योग की क्षेत्र में बदलने तकनीक को लेकर CSIR-CIMFR में सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्र ऑटोमेशन की तकनीक सीख रहे हैं
धनबाद: किसी फैक्ट्री में मोटर चल रही हो, कन्वेयर बेल्ट पर कोयला आगे बढ़ रहा हो या पावर प्लांट में बिजली उत्पादन की प्रक्रिया चल रही हो. इन सबके बीच मशीनों को नियंत्रित करने और उनकी निगरानी करने वाली तकनीक की अहम भूमिका होती है. लेकिन किसी मशीन को चलाना और उसे इस तरह नियंत्रित करना कि उसकी गति जरूरत के मुताबिक बदले, खराबी का पता समय पर चले और उपकरण सुरक्षित रहें, दोनों अलग-अलग बातें हैं.
इसी तकनीक को समझने के लिए धनबाद के सीएसआईआर-सिंफर में राजकीय पॉलिटेक्निक के 66 विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया. जिसमें विद्यार्थियों ने PLC, HMI, VFD और सेंसर की कार्यप्रणाली को प्रैक्टिकल के जरिए समझा. खास बात यह है कि इसके लिए संस्थान में एक विशेष ट्रेनिंग पैनल तैयार किया गया है, जिस पर मोटर को नियंत्रित करने से लेकर उसकी गति और संचालन की निगरानी तक का प्रदर्शन किया गया.किताबी ज्ञान से आगे की पढ़ाई
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई में विद्यार्थियों को मोटर, विद्युत सर्किट, मशीनों और नियंत्रण प्रणालियों के बारे में बताया जाता है. लेकिन जब यही तकनीक किसी औद्योगिक संयंत्र में इस्तेमाल होती है, तो उसकी वास्तविक कार्यप्रणाली समझने के लिए व्यावहारिक अनुभव भी जरूरी हो जाता है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए सीएसआईआर-सिंफर यानी केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान में कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किया गया.
सीएसआईआर इंटीग्रेटेड स्किल इनिशिएटिव के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में राजकीय पॉलिटेक्निक, धनबाद के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के 66 विद्यार्थियों ने भाग लिया. प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को औद्योगिक स्वचालन की उन तकनीकों से परिचित कराना था, जिनका इस्तेमाल आधुनिक उद्योगों में मशीनों के संचालन, निगरानी और नियंत्रण के लिए किया जाता है.

ऑटोमेशन तकनीक के बारे में जानकारी देते हुए
मशीनों को नियंत्रित करने की तकनीक
संस्थान में विद्यार्थियों को PLC, HMI, VFD और सेंसर की कार्यप्रणाली समझाई गई. PLC यानी प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर एक ऐसी नियंत्रण प्रणाली है, जो सेंसर से प्राप्त संकेतों के आधार पर पहले से निर्धारित प्रोग्राम के अनुसार मशीनों के संचालन को नियंत्रित करती है. सेंसर किसी वस्तु की मौजूदगी, तापमान, दबाव, दूरी या अन्य स्थितियों का पता लगाकर संबंधित संकेत उपलब्ध करा सकते हैं. इन संकेतों के आधार पर PLC निर्धारित लॉजिक के अनुसार आउटपुट देता है.
वहीं HMI यानी ह्यूमन मशीन इंटरफेस के जरिए ऑपरेटर स्क्रीन पर मशीन की स्थिति और उससे जुड़े आंकड़े देख सकता है. जरूरत के मुताबिक उपलब्ध नियंत्रणों का इस्तेमाल कर मशीन के संचालन में बदलाव भी किया जा सकता है. VFD यानी वेरिएबल फ्रीक्वेंसी ड्राइव की मदद से उपयुक्त इलेक्ट्रिक मोटर की गति को नियंत्रित किया जा सकता है. इन तकनीकों का संयुक्त इस्तेमाल औद्योगिक प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और नियंत्रित बनाने में मदद करता है.

प्रैक्टिकली ऑटोमेशन के बारे में छात्रों का जानकारी देते हुए
विशेष ट्रेनिंग पैनल पर समझाई गई तकनीक
इस प्रशिक्षण का एक प्रमुख आकर्षण है PLC प्रोग्रामिंग, टेस्टिंग और ट्रेनिंग पैनल. इसे सीएसआईआर-सिंफर के वैज्ञानिक डॉ प्रेम कुमार ने तैयार किया है. इस पोर्टेबल पैनल में PLC, HMI, VFD, रिले कार्ड और मोटर नियंत्रण से जुड़े विभिन्न उपकरण लगाए गए हैं. इसकी मदद से विद्यार्थियों को केवल यह नहीं बताया गया कि अलग-अलग उपकरण क्या हैं, बल्कि यह भी समझाया गया कि वे एक-दूसरे के साथ मिलकर किस तरह काम करते हैं.
प्रशिक्षण के दौरान तीन-फेज मोटर को चलाने, उसकी गति बदलने और उसकी दिशा नियंत्रित करने का प्रदर्शन किया गया. HMI स्क्रीन पर मोटर की गति और उपलब्ध ऑपरेटिंग पैरामीटर दिखाए गए. इसके जरिए विद्यार्थियों को समझाया गया कि औद्योगिक संयंत्रों में इंजीनियर और ऑपरेटर कंट्रोल रूम में बैठकर मशीनों की स्थिति की निगरानी कैसे कर सकते हैं. इस तरह के पैनल का एक लाभ यह भी है कि इसे अलग-अलग शैक्षणिक संस्थानों में ले जाकर प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
600 से 1500 RPM तक मोटर की गति का प्रदर्शन
पैनल पर विद्यार्थियों को मोटर की गति नियंत्रित करने का व्यावहारिक उदाहरण दिखाया गया. प्रदर्शन के दौरान मोटर को लगभग 600 RPM यानी प्रति मिनट 600 चक्कर की गति से चलाकर उसकी गति बढ़ाने की प्रक्रिया समझाई गई. VFD के माध्यम से निर्धारित सीमा के भीतर गति बढ़ाकर लगभग 1500 RPM तक ले जाने का प्रदर्शन किया गया. इस उदाहरण से विद्यार्थियों को समझाया गया कि औद्योगिक जरूरत के अनुसार मोटर की गति को नियंत्रित किया जा सकता है.
हालांकि वास्तविक मोटर की अधिकतम सुरक्षित गति उसकी रेटिंग और निर्माता के निर्देशों पर निर्भर करती है. पैनल के माध्यम से मोटर की दिशा को फॉरवर्ड से रिवर्स करने की प्रक्रिया भी समझाई गई. इसके साथ ही मोटर के करंट, वोल्टेज और गति जैसे उपलब्ध आंकड़ों की निगरानी का प्रदर्शन किया गया. इसका महत्व उन उद्योगों में और बढ़ जाता है, जहां मोटर के संचालन में बदलाव का सीधा असर उत्पादन प्रक्रिया पर पड़ता है.
मोटर की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी
औद्योगिक क्षेत्र में मोटर चलाना जितना महत्वपूर्ण है, उसे खराबी से बचाना भी उतना ही जरूरी है. किसी कन्वेयर बेल्ट या दूसरी उत्पादन प्रणाली में मोटर खराब होने से काम रुक सकता है और आर्थिक नुकसान हो सकता है. इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को पैनल में लगाए गए सुरक्षा उपकरणों की भूमिका भी समझाई गई. इनमें थ्री-फेज सप्लाई की निगरानी करने वाला प्रोटेक्शन डिवाइस, सर्किट ब्रेकर, कॉन्टैक्टर और ओवरलोड रिले जैसे उपकरण शामिल हैं.
उदाहरण के लिए अगर मोटर निर्धारित सीमा से अधिक करंट खींचती है, तो उचित रूप से सेट किया गया ओवरलोड रिले सर्किट को ट्रिप कर मोटर को संभावित नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है. इसी तरह विद्युत आपूर्ति में गड़बड़ी होने पर संबंधित सुरक्षा उपकरण मोटर के संचालन को रोक सकते हैं. इस प्रशिक्षण के जरिए विद्यार्थियों को बताया गया कि औद्योगिक स्वचालन में केवल मशीन को चलाने का प्रोग्राम बनाना पर्याप्त नहीं है. नियंत्रण प्रणाली के साथ सुरक्षा व्यवस्था को समझना भी जरूरी है.
पावर प्लांट से लेकर माइनिंग तक उपयोग
औद्योगिक स्वचालन की इन तकनीकों का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जाता है. पावर प्लांट में तापमान, दबाव, प्रवाह और अन्य प्रक्रियागत मानकों की निगरानी में सेंसर और नियंत्रण प्रणालियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. वहीं, खनन क्षेत्र में कन्वेयर बेल्ट, पंप, मोटर और दूसरी मशीनों के संचालन में ऑटोमेशन का उपयोग किया जाता है.
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को पावर प्लांट के ब्लॉक डायग्राम के माध्यम से यह समझाने पर भी जोर दिया गया कि बिजली उत्पादन की प्रक्रिया में विभिन्न उपकरण कहां काम करते हैं और सेंसर तथा नियंत्रण प्रणालियों की जरूरत क्यों पड़ती है. इससे विद्यार्थियों को किसी एक उपकरण के बजाय पूरी औद्योगिक प्रक्रिया में उसके इस्तेमाल को समझने का अवसर मिला.
AI के दौर में भी PLC की भूमिका
दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल बढ़ रहा है. इन तकनीकों के जरिए औद्योगिक आंकड़ों का विश्लेषण, निगरानी और संभावित खराबियों की पहचान करने जैसे काम किए जा सकते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि औद्योगिक नियंत्रण प्रणालियों की जरूरत समाप्त हो जाएगी.
PLC, HMI और SCADA जैसी प्रणालियां आज भी मशीनों और औद्योगिक प्रक्रियाओं के नियंत्रण तथा निगरानी में महत्वपूर्ण हैं. AI और मशीन लर्निंग को इन प्रणालियों के साथ जोड़कर अतिरिक्त विश्लेषण और बेहतर निगरानी की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं. ऐसे में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स के विद्यार्थियों के लिए पारंपरिक विद्युत ज्ञान के साथ आधुनिक नियंत्रण प्रणालियों को समझना भी महत्वपूर्ण है.
छात्र राहुल ने बताया कि कॉलेज में PLC, SCADA और HMI के बारे में पढ़ने के बाद सिंफर में इन तकनीकों को प्रैक्टिकल के जरिए समझने का अवसर मिला. उन्होंने यह भी बताया कि PLC प्रोग्रामिंग और उसके इस्तेमाल की जानकारी उनके लिए उपयोगी रही. वहीं छात्रा काजल बताती हैं कि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए PLC, HMI और VFD जैसी तकनीकों को सीखना भविष्य के तकनीकी विकास और करियर की तैयारी में मददगार हो सकता है.
कौशल विकास और रोजगार की तैयारी
सीएसआईआर-सिंफर में खनन, ईंधन और संबंधित क्षेत्रों में पहले से कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं. संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, PLC, HMI, VFD, सेंसर और औद्योगिक स्वचालन पर केंद्रित इस तरह का विशेष हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम पहली बार आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम को संस्थान के आईटी सर्विसेज और मानव संसाधन विकास विभाग के सहयोग से संचालित किया गया. प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को सिद्धांत, उपकरणों की पहचान, नियंत्रण प्रणाली और व्यावहारिक प्रदर्शन के जरिए तकनीकी जानकारी दी गई.
ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों और उद्योगों की जरूरतों के बीच की दूरी कम करना है. हालांकि, केवल तीन दिन का प्रशिक्षण नौकरी की गारंटी नहीं देता, लेकिन इससे विद्यार्थियों को उन तकनीकों की शुरुआती व्यावहारिक समझ मिल सकती है. जिनसे उनका सामना आगे औद्योगिक क्षेत्र में हो सकता है.
सीएसआईआर-सिंफर का यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को किताबों में पढ़ी गई तकनीक को वास्तविक उपकरणों के जरिए समझने का अवसर देता है. मोटर की गति नियंत्रित करने से लेकर सुरक्षा उपकरणों की भूमिका और PLC प्रोग्रामिंग तक, प्रशिक्षण का जोर व्यावहारिक ज्ञान पर रहा. अब इस अनुभव को आगे की पढ़ाई और अधिक उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ना विद्यार्थियों के कौशल विकास की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगी.



