अबुआ आवास और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने का दावा, पति का आधार नहीं बनने से पेंशन भी अटकी शंकर माक्षी
संवादाता अजीत कुमार जायसवाल
साहेबगंज / मंडरो/ सीमावर्ती जिला के गोड्डा में सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए अबुआ आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाएं चला रही है, लेकिन धरातल पर आज भी कई परिवार झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। ऐसा ही एक मामला ठाकुरगंगटी प्रखंड क्षेत्र के धरनीचक गांव से सामने आया है।
गांव की काली देवी अपने पति, बेटे और बहू के साथ झोपड़ी वाले घर में रहने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और पक्का मकान बनवाने की क्षमता नहीं है। इसके बावजूद अब तक उन्हें अबुआ आवास अथवा प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका है।
काली देवी के मुताबिक, उनके पति का अब तक आधार कार्ड भी नहीं बन पाया है। हाथों के अंगूठे का फिंगरप्रिंट मशीन में ठीक से नहीं आने के कारण आधार से जुड़ी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। इसी वजह से परिवार को पेंशन योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि धरनीचक गांव में काली देवी अकेली नहीं हैं। कई ऐसे गरीब परिवार हैं, जिनके सिर पर आज भी पक्की छत नहीं है और वे झोपड़ियों में जीवन गुजार रहे हैं। बरसात और खराब मौसम के दौरान इन परिवारों की परेशानी और बढ़ जाती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार की योजनाएं अगर गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए हैं, तो उनका लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है? ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में सर्वे कराकर जरूरतमंद परिवारों को चिन्हित किया जाए और पात्र लोगों को आवास, पेंशन तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।
ग्रामीणों की उम्मीद अब प्रशासन से है कि कागजों की प्रक्रिया और तकनीकी अड़चनों के बीच फंसे गरीब परिवारों की वास्तविक परेशानी को समझते हुए उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।



