सोनिया गांधी की आने वाली आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ के भारत में प्रकाशन को लेकर देश भर की राजनीति गरमा गई है. इस पूरे घटनाक्रम पर झारखंड कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष राजनीतिक दबाव बनाकर इतिहास के सच को पाठकों तक पहुंचने से रोक रहा है.
रांची : कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की आने वाली नई आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ के भारत में प्रकाशन को लेकर देश भर की राजनीति गरमा गई है. इस पूरे घटनाक्रम पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार और सत्ता पक्ष पर तीखा हमला बोला है. पार्टी का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के कारण प्रकाशक पर दबाव बनाकर इतिहास के सच को भारतीय पाठकों के सामने आने से रोका जा रहा है.
प्रकाशक पर दबाव बनाकर सच को रोकने का आरोप
झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने रांची में मीडिया से बातचीत करते हुए इस मुद्दे पर कड़ा एतराज जताया. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस पूरी कवायद के पीछे प्रकाशक पर बनाया जा रहा राजनीतिक दबाव काम कर रहा है. राकेश सिन्हा ने कहा, “किताब से चुनिंदा अंशों या अध्यायों को हटाया जाना या उस पर रोक लगाना पूरी तरह से अनुचित और गलत है. जब कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत अनुभवों और ऐतिहासिक घटनाक्रमों के आधार पर कोई किताब लिखता है, तो किसी को भी उस किताब या सच से डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए. लेकिन कुछ लोग सच उजागर होने के डर से इसे दबाने का प्रयास कर रहे हैं.”
क्या है सोनिया गांधी की आत्मकथा को लेकर विवाद?
सोनिया गांधी का यह संस्मरण आगामी 10 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अल्फ्रेड ए नोप (पेंगुइन रैंडम हाउस का उप-ब्रांड) द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब पेंगुइन इंडिया द्वारा किताब में शामिल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और चीन सीमा विवाद से जुड़े कुछ संवेदनशील संदर्भों में संशोधन करने और अंश हटाने का सुझाव दिया गया, जिसे सोनिया गांधी ने अस्वीकार कर दिया. इसके बाद भारत में इसके प्रकाशन और वितरण को लेकर अनिश्चितता बन गई. वहीं, प्रकाशक पेंगुइन इंडिया ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि किसी भी पांडुलिपि की फैक्ट-चेकिंग करना प्रकाशक की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और वे किताब छापने के इच्छुक थे.



