इकलौते बेटे के बिछड़ने से गम में डूबा परिवार, घाट पर हर आंख हुई नम
साहिबगंज। संत जेवियर स्कूल के पीछे गंगा घाट पर स्नान के दौरान लापता हुए 14 वर्षीय अभिज्ञान पांडे का शव घटना के करीब 24 घंटे बाद चानन घाट के समीप बरामद कर लिया गया। शव मिलने की खबर के साथ ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। जिस घाट से अभिज्ञान गंगा में डूबा था, वहां से करीब दो किलोमीटर दूर उसका शव बरामद हुआ।
बुधवार को पुलिस और स्थानीय गोताखोरों की मदद से शव को बाहर निकाला गया। इसके बाद गंगा रिवर थाना प्रभारी लव कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
दोस्त बच गए, अभिज्ञान नहीं लौट सका
मंगलवार सुबह अभिज्ञान पांडे अपने मित्र कनिष्क राजपूत और अंश कुमार के साथ घर से कबड्डी खेलने की बात कहकर निकला था। तीनों गंगा घाट पहुंचकर स्नान करने लगे। इसी दौरान अभिज्ञान गहरे पानी में चला गया। उसे बचाने के प्रयास में उसके दोनों मित्र भी डूबने लगे, लेकिन स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों को बचा लिया। हालांकि अभिज्ञान गंगा की गहराई में समा गया था।

मां की चीख और पिता की खामोशी ने सभी को रुलाया
शव बरामद होने के बाद घाट पर बेहद मार्मिक दृश्य देखने को मिला। इकलौते बेटे को खो चुकी मां का रो-रोकर बुरा हाल था। वह बार-बार यही कह रही थी कि “24 घंटे पहले मेरा लाल मेरे साथ था, आज वह हम सबको छोड़कर चला गया।” वहीं पिता अरुण पांडे की आंखों में आंसू और चेहरे पर गहरा दर्द साफ दिखाई दे रहा था। जिस बेटे को बेहतर भविष्य देने के सपने संजोए थे, उसकी असमय मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।

अभिज्ञान संत जेवियर्स स्कूल में कक्षा आठ का छात्र था। पढ़ाई के साथ खेलकूद में भी उसकी रुचि थी। उसके निधन की खबर से दोस्तों, शिक्षकों और मोहल्ले के लोगों में भी गहरा शोक है। घाट पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं और हर कोई यही कह रहा था कि आखिर इतनी छोटी उम्र में यह दर्दनाक हादसा क्यों हुआ।

संसाधनों की कमी पर फिर उठे सवाल
घटना के बाद एक बार फिर गंगा घाटों की सुरक्षा व्यवस्था, स्थानीय गोताखोरों को संसाधन उपलब्ध कराने और साहिबगंज में एनडीआरएफ की स्थायी यूनिट स्थापित करने की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आधुनिक बचाव संसाधन उपलब्ध होते तो शायद राहत कार्य और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता था।




