तालझारी के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक और जैविक खेती के बारे में प्रशिक्षित किया गया. मृदा स्वास्थ्य कार्ड से आय बढ़ाने के गुर सिखाए गए.
(साहिबगंज): कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा), साहिबगंज के अंतर्गत कृषि विस्तार उप-मिशन के तहत प्रखंड तालझारी की करणपुरा, सकड़भंगा, बड़ा दुर्गापुर एवं तालझारी पंचायत में आयोजित कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को हुआ. पिछले 27 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक प्रतिदिन दो पंचायतों में किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए. इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक जानकारी तथा सरकारी कृषि योजनाओं से अवगत कराना था. इससे किसान उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर अपने उत्पादन एवं आय में वृद्धि कर सकेंगे.
पंचायतवार अलग-अलग विषयों पर दी गई विशेष जानकारी
चार दिनों तक चले इस शिविर के दौरान पंचायतवार अलग-अलग महत्वपूर्ण विषयों पर किसानों को प्रशिक्षित किया गया. इसकी रूपरेखा इस प्रकार रही:
- बड़ा दुर्गापुर पंचायत: किसानों को प्राकृतिक खेती (Natural Farming) के तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया.
- सकड़भंगा पंचायत: इस पंचायत में डिजिटल क्रॉप सर्वे (Digital Crop Survey) की उपयोगिता के बारे में प्रशिक्षण दिया गया.
- तालझारी पंचायत: किसानों को जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा देने के लिए जागरूक किया गया.
- करणपुरा पंचायत: यहाँ मिट्टी की गुणवत्ता जांचने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) विषय पर किसानों को प्रशिक्षित किया गया.
इन अधिकारियों और तकनीकी प्रबंधकों की उपस्थिति में मिला प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अलग-अलग पंचायतों में विशेषज्ञों और अधिकारियों की तैनाती की गई थी. सकड़भंगा पंचायत में तालझारी के सहायक तकनीकी प्रबंधक (ATM) आदर्श कुमार एवं बोरियो के प्रखंड तकनीकी प्रबंधक (BTM) अनुपम हांसदा की उपस्थिति में प्रशिक्षण दिया गया. बड़ा दुर्गापुर पंचायत में राजमहल के सहायक तकनीकी प्रबंधक प्रवीण कुमार एवं आदर्श कुमार ने किसानों को जानकारी दी. इसके साथ ही तालझारी पंचायत में एटीएम आदर्श कुमार एवं आदर्श एफपीओ के जिला समन्वयक प्रिय रंजन कुमार उपस्थित रहे. वहीं, करणपुरा पंचायत में पौधा संरक्षण केंद्र (तालझारी) के प्रभारी ओम प्रकाश पंडित एवं एटीएम आदर्श कुमार की उपस्थिति में किसानों को प्रशिक्षित किया गया.
मृदा स्वास्थ्य कार्ड और संतुलित उर्वरक के उपयोग पर विशेष ज़ोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने, डिजिटल क्रॉप सर्वे की उपयोगिता समझने तथा मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग करने के लिए जागरूक किया गया. विशेषज्ञों ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त कर वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के महत्व पर भी विशेष जोर दिया ताकि मिट्टी की सेहत भी बनी रहे और पैदावार भी अच्छी हो.



