झारखंड में नदी किनारे मनमाने निर्माण पर लगेगी रोक. नियम तोड़ने पर जेल और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान.
रांची. झारखंड में नदियों के किनारे मनमाने निर्माण, जमीन भरने और कचरा डालने पर रोक लगाने की तैयारी है. इसके लिए प्रस्तावित झारखंड फ्लड प्लेन जोनिंग एक्ट-2026 के मसौदे में बाढ़ के खतरे के आधार पर नदी क्षेत्रों को तीन जोन में बांटने और वहां निर्माण व औद्योगिक गतिविधियों को नियंत्रित करने का प्रावधान किया गया है. मसौदे के अनुसार, नदी के प्राकृतिक किनारे से जमीन की ओर 100 मीटर तक नये स्थायी निर्माण पर सीमांकन पूरा होने तक अंतरिम रोक लगाने का प्रस्ताव है. नियमों का उल्लंघन करने पर व्यक्ति को दो लाख रुपये तक और कंपनियों को 10 लाख रुपये तक जुर्माना भरना पड़ सकता है. गंभीर उल्लंघन के मामलों में कैद और अधिक जुर्माने का भी प्रावधान प्रस्तावित है.
बाढ़ के खतरे के आधार पर तीन जोन में बंटेंगे क्षेत्र
प्रस्तावित कानून का उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जमीन के इस्तेमाल और निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करना है. इसके तहत बाढ़ के खतरे के आधार पर नदी के आसपास के क्षेत्रों को तीन जोन में बांटने का प्रस्ताव है. सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी निर्माण पर रोक लगाने की व्यवस्था होगी, जबकि अन्य क्षेत्रों में निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों को निर्धारित नियमों के तहत नियंत्रित किया जा सकेगा.
इस व्यवस्था से नदी के बाढ़ क्षेत्र में अनियंत्रित निर्माण और ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने का प्रयास होगा, जिनसे जल प्रवाह प्रभावित हो सकता है.
सीमांकन पूरा होने तक 100 मीटर के दायरे में रोक
मसौदे में नदी या जलधारा के बाढ़ क्षेत्र की सीमा निर्धारित करने के लिए अधिसूचना जारी होने के बाद अंतरिम प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है. अंतिम सीमांकन पूरा होने तक नदी के प्राकृतिक किनारे से जमीन की ओर 100 मीटर तक नये स्थायी निर्माण पर रोक रहेगी.
इसके अलावा, नदी के बाढ़ क्षेत्र में भूमि भरने, जमीन को पुनः प्राप्त करने, कचरा डालने और जल प्रवाह में बाधा पैदा करने वाली गतिविधियों को सामान्यतः अनुमति नहीं देने का प्रस्ताव है. इन प्रावधानों का उद्देश्य नदी के प्राकृतिक प्रवाह और बाढ़ क्षेत्र को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को नियंत्रित करना है.
व्यक्ति और कंपनियों पर अलग-अलग जुर्माने का प्रस्ताव
प्रस्तावित कानून में नियमों के उल्लंघन पर व्यक्ति और कंपनियों के लिए अलग-अलग दंड का प्रावधान किया गया है. किसी व्यक्ति द्वारा नियम तोड़ने पर एक से दो लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है. नोटिस मिलने के बाद भी उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन एक हजार से तीन हजार रुपये तक अतिरिक्त जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है.
वहीं, कंपनी, डेवलपर, खदान, औद्योगिक प्रतिष्ठान या अन्य कॉरपोरेट निकाय द्वारा नियमों का उल्लंघन करने पर पांच से 10 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है.
गंभीर उल्लंघन पर कैद और अधिक जुर्माना
मसौदे में गंभीर उल्लंघन के मामलों में जेल की सजा का भी प्रावधान प्रस्तावित है. ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति को एक वर्ष तक की कैद या दो लाख से पांच लाख रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों सजाएं दी जा सकती हैं.
कंपनियों के गंभीर उल्लंघन पर एक वर्ष तक की कैद या 10 लाख से 25 लाख रुपये तक जुर्माना अथवा दोनों सजाओं का प्रस्ताव है.
हालांकि, ये प्रावधान प्रस्तावित कानून के मसौदे का हिस्सा हैं. इनके अंतिम स्वरूप और लागू होने की स्थिति की पुष्टि आधिकारिक अधिसूचना से की जानी होगी.



