पीएम किसान योजना के तहत 24वीं किस्त में 9.34 करोड़ किसानों को ₹18,700 करोड़ मिले. जानें कृषि और पशुपालन में देश की प्रगति और किसानों को ₹6000 की सालाना सहायता.
PM Kisan Yojana: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 24वीं किस्त के तहत शुक्रवार को देशभर के लगभग 9.34 करोड़ किसानों के खाते में 18,700 करोड़ रुपये की राशि जारी की गयी. इस अवसर पर भाकृअनुप के राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान (निसा), नामकुम में कार्यक्रम का सीधा प्रसारण आयोजित किया गया. इसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर शामिल हुए. कार्यक्रम में झारखंड के 415 किसानों ने भी हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री के संबोधन को सुना.
कृषि और पशुपालन में बढ़ी देश की ताकत
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने गुजरात में विभिन्न बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया. देश को संबोधित करते हुए उन्होंने पिछले 12 वर्षों में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में हुई प्रगति का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इस अवधि में देश में दूध उत्पादन करीब 1.6 गुना बढ़ा है. पशुओं की नस्ल सुधार, वैज्ञानिक अनुसंधान और समय पर टीकाकरण से इस क्षेत्र को मजबूती मिली है. मधुर क्रांति के कारण भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहद उत्पादक देश बना है. वहीं, हाल के वर्षों में समुद्री खाद्य उत्पादों का निर्यात भी दोगुना हुआ है.

किसानों को सालाना 6 हजार की मदद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि पीएम-किसान योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. इससे किसानों को खेती की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है. उन्होंने किसानों से इस राशि का इस्तेमाल उन्नत किस्म के बीज और अन्य जरूरी कृषि सामग्री खरीदने में करने की अपील की, ताकि कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि हो सके.

12 साल में कृषि बजट पांच गुना बढ़ा
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं. इस दौरान देश का कृषि बजट लगभग पांच गुना बढ़ा है. इससे कृषि आधारभूत संरचना के विकास, किसानों के कल्याण और कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हुए हैं.

कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव फ्रैंकलिन एल खोबुंग, झारखंड सरकार के कृषि निदेशक बिद्यानंद शर्मा पंकज, भूमि संरक्षण निदेशक विकास कुमार, निदेशक समेति रामशंकर प्रसाद एवं उद्यानिकी निदेशक प्रवीण केरकेट्टा, संस्थान के निदेशक डॉ अभिजीत कर आदि मौजूद थे.



