खनिज सेस के अधिकार को लेकर झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है
रांची: खनिजों पर सेस लगाने के राज्यों के अधिकार को खत्म किए जाने के विरोध में झारखंड सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है. जानकारी के मुताबिक, 5-6 अक्टूबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है. इस संबंध में प्रस्ताव 25 सितंबर को होने वाली राज्य कैबिनेट की बैठक में लाए जाने की संभावना है.
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिख चुके हैं सीएम
केंद्र सरकार की ओर से Mines and Minerals (Development and Regulation) यानी MMDR Act में किए गए संशोधन के बाद राज्यों के खनिजों पर टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने के अधिकार को लेकर झारखंड सरकार ने कड़ा विरोध जताया है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर संशोधन के वित्तीय और संघीय ढांचे पर पड़ने वाले असर को सामने रखा था. मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा था कि खनिज से जुड़ा राजस्व झारखंड की वित्तीय क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
मुख्यमंत्री ने अनुमान जताया था कि Mineral Bearing Land Cess से राज्य को करीब 7,110 करोड़ रुपये सालाना की आय हो सकती है. वहीं झारखंड सरकार की ओर से इस संशोधन से राज्य को होने वाले कुल संभावित नुकसान को करीब 15 हजार करोड़ रुपये सालाना बताया जा रहा है.
सीएम पूर्व में दिए थे विशेष सत्र के संकेत
केंद्र के फैसले के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के संकेत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही दे चुके हैं. 18 अगस्त को कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने केंद्र के फैसले के खिलाफ विधानसभा में चर्चा और आगे की रणनीति बनाने की बात कही थी.
झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से भी इस मुद्दे पर चरणबद्ध आंदोलन चलाया जा रहा है. राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर लगातार केंद्र के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं.
पहले भी बुलाए जा चुके हैं विशेष सत्र अगर 5-6 अक्टूबर को विशेष सत्र बुलाया जाता है तो यह हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा किसी बड़े राजनीतिक या नीतिगत मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाने का एक और उदाहरण होगा. इससे पहले प्रमुख विशेष सत्र इस तरह रहे हैं….
नवंबर 2020 में सरना धर्म कोड को लेकर सत्र
हेमंत सोरेन सरकार ने 11 नवंबर 2020 को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था. इसमें 2021 की जनगणना में सरना धर्म के लिए अलग कोड/कॉलम की मांग वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था. प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था.
1932 खतियान और 77% आरक्षण पर सत्र
11 नवंबर 2022 के विशेष सत्र में सरकार ने दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराए. इनमें 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय की परिभाषा तय करने वाला विधेयक और सरकारी नौकरियों में आरक्षण बढ़ाकर 77 प्रतिशत करने वाला विधेयक शामिल था. दोनों विधेयकों को बाद में लागू करने के लिए केंद्र स्तर पर संवैधानिक प्रक्रिया की जरूरत बताई गई थी.



