मरीन ड्राइव पर हुए हादसे को देखकर पता चलता है कि कार की रफ्तार काफी तेज थी। जिस तरह हादसा हुआ और कार के साथ शव टुकड़ों में बंट गए, उससे रफ्तार का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ 100 किलोमीटर प्रति घंटे
जमशेदपुर| मरीन ड्राइव पर हुए हादसे को देखकर पता चलता है कि कार की रफ्तार काफी तेज थी। जिस तरह हादसा हुआ और कार के साथ शव टुकड़ों में बंट गए, उससे रफ्तार का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार बता रहे हैं। मरीन ड्राइव में भी लोगों ने कार को कई बार तेज गति से जाते देखा था। ऑटो मोबाइल विशेषज्ञ अजकार अली ने बताया कि जिस तरह कार क्षतिग्रस्त हुई है, उससे हादसे के समय उसकी रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रही होगी। तेज रफ्तार के कारण ही हादसे के वक्त एयर बैग से बलून तो निकला, पर फट गया। ऐसा दो ही स्थिति में होता है। या तो गंभीर हादसा हो या किसी बहुत भारी या नुकीली चीज़ से तेज़ रफ्तार में गाड़ी टकराई हो।एयरबैग खुला लेकिन…
टक्कर के अत्यधिक दबाव या गाड़ी के टूटे हुए हिस्सों जैसे डैशबोर्ड या स्टीयरिंग व्हील के नुकीले टुकड़े से एयरबैग का कपड़ा फट सकता है। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट के कारण कभी-कभी एयरबैग को फुलाने वाला केमिकल सिस्टम बहुत ज़्यादा दबाव के साथ ब्लास्ट कर जाता है, जिससे एयरबैग का बलून खुलते ही फट जाता है। एमजीएम अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में सुबह से ही लोगों का जमावड़ा लगने लगा था। वहां मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के पति रत्नेश कुमार सिंह, मेयर सुधा गुप्ता पहुंचे। वहां अपनी बेटी को शव को देखकर सन्न रह गए और कुर्सी पर बैठ गए। युविका की नानी भी वहां पहुंचीं, लेकिन वह उन्हें बीमार होने के कारण कार से नहीं उतरने दिया गया और शव नहीं दिखाया गया। उसकी मौसी सहित कई रिश्तेदार भी पहुंचे। वहां यह बात होने लगी कि मंत्री और युविका की मां दीपिका पांडेय सिंह यहां आएंगी। इसके लिए युविका के शव को एक कमरे में रखा गया और अन्य शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। बाद में पता चला कि मंत्री यहां नहीं आएंगी तो शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। एमजीएम पहुंची पुलिस की टीम
थोड़ी देर में वहां डीआईजी, उपायुक्त, एसएसपी, डीडीसी, एसडीएम सहित कई पदाधिकारी पहुंच गए। वहां अस्पताल के प्राचार्य, अधीक्षक, चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित शहर के कई व्यापारी संगठन के लोग पहुंच गए। पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता भी पहुंचे और शव के पोस्टमार्टम से लेकर रांची भेजवाने तक की व्यवस्था में लगे रहे। मौके पर विधायक सोमेश सोरेन, संजीव सरदार, कांग्रेस का जिलाध्यक्ष परविंदर सिंह पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी, टीएसी सदस्य जोसाई मार्डी, जेएमएम के राजू गिरी थे। जैसे-जैसे लोगों को पता चल रहा था, लोग पहुंचते जा रहे थे। सैकड़ों लेागों की भीड़ हो गई थी।
इस मामले की जानकारी देते हुए डीएसीपी सीसीआर मनोज ठाकुर ने बताया कि सड़क दुर्घटना में चार छात्र-छात्राओं की मौत हुई है। प्रारंभिक जांच में ट्रक खराब होने की बात सामने आई है। गलती किसकी है, इसकी जांच की जा रही है।मरीन ड्राइव पर जिस खड़े ट्रक से कार टकराई, वह आदित्यपुर से दुर्गापुर जा रहा था। ट्रक मालिक और चालक आदित्यपुर के वास्तु विहार निवासी अयोध्या तिवारी हैं। उनके बेटे पंकज तिवारी ने बताया कि ट्रक खराबी की सूचना पर वह रात में बाइक से मौके पर पहुंचा था। मैकेनिक को बुलाया गया, लेकिन ट्रक स्टार्ट नहीं हुआ। रात करीब दो बजे अयोध्या तिवारी दूसरे मिस्त्री को देखने चले गए। उनका बेटा ट्रक में ही बैठा था। उसके अनुसार, ट्रक के पीछे लाल कपड़ा लगाया गया था। रात करीब 2.40 बजे मरीन ड्राइव पर अचानक तेज आवाज हुई। आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग घरों से निकलकर सड़क पर पहुंचने लगे। ट्रक में बैठे युवक ने पीछे जाकर देखा तो कार का अगला हिस्सा ट्रक के अंदर घुस चुका था। कार में सवार चारों लोग अंदर फंसे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार हादसे से पहले मरीन ड्राइव पर दो-तीन बार अप-डाउन कर रही थी। उसे लगा कि कुछलोग ट्रक के आसपास घूम रहे हैं। इस दौरान दोमुहानी की ओर से डोबो पुल की तरफ जा रही कार ट्रक से टकरा गई। कार में चार लोग थे। आगे चालक युवक और एक युवती बैठे थे, जबकि पीछे एक युवक और एक युवती थे।



