झारखंड हाईकोर्ट के कार्यक्रम और स्टेट डिनर में अधिवक्ता संघ के सदस्यों को आमंत्रित नहीं करने पर नाराजगी. संघ ने मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपकर भेदभाव का आरोप लगाया.
रांची: झारखंड हाईकोर्ट परिसर में सोमवार को आयोजित भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के आधिकारिक कार्यक्रम में अधिवक्ता संघ के सदस्यों को आमंत्रित नहीं किये जाने को लेकर अधिवक्ता संघ ने नाराजगी जताई है. इस संबंध में संघ की ओर से तीन नवंबर को झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपा गया है. ज्ञापन में दो नवंबर 2026 को हाईकोर्ट परिसर में आयोजित कार्यक्रम और होटल बीएनआर चाणक्य में आयोजित राजकीय रात्रिभोज (स्टेट डिनर) में संघ के सदस्यों के साथ कथित भेदभाव किये जाने का आरोप लगाया गया है.
कार्यक्रम में शामिल थे सुप्रीम कोर्ट के दो जज
संघ के महासचिव नवीन कुमार की ओर से पेश किए गए ज्ञापन में कहा गया है कि दो नवंबर को झारखंड हाईकोर्ट परिसर में सुप्रीम कोर्ट के दो माननीय न्यायाधीशों की गरिमामयी उपस्थिति में अधिवक्ताओं और बार के सदस्यों की सुविधाओं से संबंधित एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. संघ के अनुसार, वह हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं का प्रमुख प्रतिनिधि संगठन है. ऐसे में यह अपेक्षा स्वाभाविक थी कि संघ और उसकी कार्यकारिणी समिति के सदस्यों को कार्यक्रम में आमंत्रित कर उचित सम्मान दिया जाता. संघ का आरोप है कि इस कार्यक्रम में न तो अधिवक्ता संघ को और न ही उसके विद्वान सदस्यों को आमंत्रित किया गया.
स्टेट डिनर में भी चयनात्मक आमंत्रण का आरोप
ज्ञापन में होटल बीएनआर चाणक्य, रांची में आयोजित राजकीय रात्रिभोज (स्टेट डिनर) का भी उल्लेख किया गया है. संघ ने आरोप लगाया है कि इस कार्यक्रम में कार्यकारिणी समिति के अधिकांश सदस्यों को आमंत्रित नहीं किया गया, जबकि कुछ सदस्यों को निमंत्रण दिया गया. संघ का कहना है कि इस तरह का चयनात्मक आमंत्रण निर्वाचित पदाधिकारियों और कार्यकारिणी समिति के सदस्यों के बीच भेदभाव की भावना पैदा करता है. संघ ने कहा है कि बार और बेंच न्याय व्यवस्था के दो अभिन्न अंग हैं. अधिवक्ता संघ ने हमेशा हाईकोर्ट और उसकी ओर से आयोजित कार्यक्रमों में अपना सहयोग दिया है. न्यायालय के प्रति संघ सम्मान और श्रद्धा का भाव रखता है. इसके बावजूद संघ के सदस्यों की उपेक्षा से अधिवक्ताओं में गहरा असंतोष और निराशा है.
भविष्य में समान आमंत्रण देने की मांग
संघ ने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि इस मामले में बार के सदस्यों की भावनाओं और व्यथा पर संज्ञान लिया जाये. साथ ही भविष्य में हाईकोर्ट परिसर अथवा अन्य स्थानों पर आयोजित होने वाले सभी आधिकारिक कार्यक्रमों और समारोहों में अधिवक्ता संघ तथा उसकी कार्यकारिणी समिति के सभी सदस्यों को बिना किसी भेदभाव के आमंत्रित करने का निर्देश दिया जाये.
आवश्यक कार्रवाई की उम्मीद
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि भविष्य में यदि इस प्रकार के कार्यक्रमों में बार के सदस्यों को आमंत्रित नहीं किया जाता है, तो अधिवक्ता संघ ऐसे किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम में भाग नहीं लेगा, जिसमें बार के सदस्यों को आमंत्रित नहीं किया जायेगा. संघ ने उम्मीद जतायी है कि मुख्य न्यायाधीश इस मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई करेंगे.



