ऑस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न में दीपोत्सव 2026 के दौरान झारखंडी आदिवासी नृत्य की शानदार प्रस्तुति हुई. आठ कलाकारों ने लोकसंस्कृति का प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया.
रांची/मेलबॉर्न: ऑस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न शहर में आयोजित दीपावली उत्सव ‘दीपोत्सव 2026’ में झारखंड की आदिवासी लोकसंस्कृति की अनूठी छटा देखने को मिली. ग्लेन आयरा टाउन हॉल में बिहार-झारखंड सभा मेलबॉर्न-विक्टोरिया (बीजेएसएम-वीआईसी) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में झारखंड के आठ कलाकारों ने पारंपरिक आदिवासी लोक नृत्य पेश कर दर्शकों का मन मोह लिया. कलाकारों की प्रस्तुति के दौरान पूरा हॉल ‘जोहार’ के अभिवादन और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.
आठ कलाकारों का दिखा जलवा
इस सांस्कृतिक प्रस्तुति में रोहित कुमार, अनामिका कुमार, प्रिया, संदीप चटर्जी, अबीरा बनर्जी, रमेश प्रसाद, माधुरी और सुधांशु शेखर शामिल हुए. कलाकारों ने एक ताल और एक लय में कदम मिलाकर झारखंड की समृद्ध लोक परंपरा को मंच पर जीवंत किया. उनकी प्रस्तुति में सामूहिकता, प्रकृति के प्रति सम्मान और एकता का संदेश दिखाई दिया. विदेश की धरती पर झारखंडी संस्कृति की इस प्रस्तुति ने वहां मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों को अपनी मिट्टी और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर दिया.
विक्टोरिया के सांसद ने कलाकारों का बढ़ाया उत्साह
झारखंडी आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति समाप्त होने के बाद विक्टोरिया संसद में कॉलफील्ड के सांसद और विपक्ष के उपनेता डेविड साउथविक मंच पर पहुंचे. उन्होंने कलाकारों के साथ तस्वीरें खिंचवायीं. सांसद की मौजूदगी और कलाकारों के साथ उनकी तस्वीरों ने कार्यक्रम को खास बना दिया. कलाकारों की प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा.
झारखंड स्थापना दिवस से पहले विदेश में प्रदर्शन
यह आयोजन 15 नवंबर को मनाये जाने वाले झारखंड स्थापना दिवस से ठीक पहले हुआ. इस वर्ष झारखंड राज्य गठन के 26 वर्ष पूरे हो रहे हैं. ऐसे अवसर पर ऑस्ट्रेलिया में झारखंड की पारंपरिक संस्कृति और आदिवासी लोकनृत्य का प्रदर्शन राज्य की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामने लाने का माध्यम बना.
तीन घंटे में 21 सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
दीपोत्सव 2026 की थीम ‘घर से घर तक’ रखी गयी थी. कार्यक्रम की शुरुआत पूजा-अर्चना के साथ हुई. इसके बाद लगभग तीन घंटे तक बिहार और झारखंड के समुदाय के कलाकारों ने कुल 21 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं. कार्यक्रम में गणेश वंदना, रामायण नृत्य नाटिका और राम दरबार की झांकी आकर्षण का केंद्र रहे. बच्चों ने छठ गीत प्रस्तुत किये. इसके अलावा मिथिला के पारंपरिक लोकगीत कजरी और समदाउन, भोजपुरी नृत्य तथा कथक की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का मनोरंजन किया.
बिहार-झारखंड की साझा संस्कृति की दिखी झलक
विभिन्न भाषाओं, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विधाओं से सजे इस आयोजन का समापन भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ. दीपोत्सव के मंच पर बिहार और झारखंड की साझा सांस्कृतिक विरासत देखने को मिली. वहीं, झारखंडी आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति ने विशेष पहचान बनायी. विदेश में अपनी परंपरा, भाषा और लोककला को जीवंत रखने की यह पहल प्रवासी भारतीय समुदाय के सांस्कृतिक जुड़ाव का उदाहरण बनी.



