झारखंड के डुमरी विधायक जयराम महतो बरवाअड्डा थानेदार विवाद के चलते चर्चा में हैं. उन्होंने माफी मांगने से इनकार कर दिया है और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की घोषणा की है. जानिए विवाद की पूरी वजह और विधायक के बयान.
रांची : झारखंड के डुमरी विधायक जयराम महतो इन दिनों चर्चा में है. इसकी वजह है बरवाअड्डा थानेदार से उनका विवाद. पुलिस मेंस एसोसिएशन ने विधायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उनसे माफी मांगने को कहा है. हालांकि, जयराम महतो ने माफी मांगने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है. ये पहला मौका नहीं है जब विधायक जयराम महतो अपने तल्खे तेवर के चलते चर्चा में हैं. इससे पहले भी वे कभी पत्रकारों से भिड़ते दिखाई पड़े हैं तो कभी कोई अधिकारी से गुस्से में बात करते दिखाई दिये हैं. उनके थानेदार के साथ हुए ऑडिया वायरल विवाद, तल्ख तेवर, थानों में भ्रष्टाचार, पुलिस की कार्यशैली और भविष्य की राजनीतिक को लेकर प्रभात खबर की पत्रकार राज लक्ष्मी ने बिना किसी झिझक के खुलकर बात. इस लेख में पढ़ें, विधायक जयराम महतो ने प्रभात खबर की पत्रकार से बातचीत में क्या कहा?
वायरल ऑडियो बोले- काट-छांट कर एडिट किया गया
वायरल चल रहे 2 मिनट 51 सेकंड के ऑडियो क्लिप पर सफाई देते हुए जयराम महतो ने दावा किया कि यह ऑडियो पूरी तरह सच नहीं है. उन्होंने कहा कि इसमें लगभग 50% आवाज ही उनकी असली है, जबकि बाकी 50% हिस्से को जानबूझकर काट-छांट कर, आगे-पीछे और एडिट (सेंसर) करके जारी किया गया है. हालांकि अपनी भाषा के लहजे पर उन्होंने कहा कि परिस्थितियां ही भाषा तय करती हैं. अगर पुलिस आम जनता के साथ दुर्व्यवहार नहीं करेगी, तो उनके साथ भी तीखे लहजे में बात करने की नौबत नहीं आएगी. उन्होंने थानों के बाहर एक पारदर्शी ‘रिव्यू सिस्टम’ स्थापित करने का सुझाव दिया, ताकि जनता की संतुष्टि का निष्पक्ष आकलन किया जा सके.
‘माननीय होने से पहले मैं एक इंसान हूं’ : जयराम महतो
एक विधायक के रूप में मर्यादित भाषा का पालन न करने के सवाल पर जयराम महतो ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने से पहले वे एक सामान्य इंसान हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी सार्वजनिक मंच, मीडिया इंटरव्यू, विधानसभा या सामाजिक सभा में अपशब्दों का प्रयोग नहीं किया है. जो भी बातचीत लीक हुई है, वह एक व्यक्तिगत (पर्सनल) संवाद का हिस्सा थी. थानों की जमीनी हकीकत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि थानों में गालियां देना आम बात हो चुकी है और अगर सिर्फ गालियों के आधार पर ही कार्रवाई होने लगे, तो देश का कोई भी थाना केवल पुलिस पदाधिकारियों से ही भर जाएगा. हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि नकारात्मक माहौल में वे भी आक्रामक हो जाते हैं.
क्या है विवाद की असली वजह
जब विधायक जयराम महतो से विवाद की असली वजह पर बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला गणेश दास नामक एक दलित व्यक्ति से जुड़ा है. आरोप था कि पुलिस गणेश दास के साथ बुरी तरह मारपीट कर रही है, जिससे उसकी हाथ की छोटी उंगली टूट गई थी. जब उनकी पार्टी (JLKM) के प्रतिनिधि पुलिस को मारपीट करने से मना करने गए, तो बात बढ़ गई और तीखी नोकझोंक शुरू हो गई. उन्होंने खुलासा किया कि अपने पौने दो साल के कार्यकाल में वे थाना प्रभारी से लेकर एसपी (SP) रैंक तक के लगभग 25 पुलिस अधिकारियों से जनता के सवालों पर सीधी बहस कर चुके हैं.
JMM और BJP नेताओं का मिला समर्थन: जयराम महतो
जब विधायक से किन किन राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है इसे पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जयराम महतो ने दावा किया कि उन्हें सत्ता पक्ष (JMM) और विपक्ष (BJP) दोनों तरफ से समर्थन मिल रहा है. उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ जेएमएम के 15-16 वर्तमान व पूर्व विधायकों और राज्य स्तरीय नेताओं के व्हाट्सएप संदेश उनके पास आए हैं, जिन्होंने उनके इस कड़े रुख की सराहना की है. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय पार्टी का इकलौता विधायक होने के कारण वे व्यवस्था से बेखौफ होकर भिड़ पाते हैं, लेकिन इसी वजह से उन्हें टारगेट करना भी आसान होता है. ऑडियो लीक होने के बाद उनका मोबाइल नंबर राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र तक वायरल कर दिया गया, जिसके बाद लगातार आ रहे फोन कॉल्स आ रहे हैं. जिससे परेशान होकर उन्हें अपना सिम कार्ड बंद करना पड़ा.
जयराम महतो बोले- जारी रहेगी लड़ाई
जयराम महतो ने घोषणा की कि वे व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए थाना, अंचल (सर्कल ऑफिस) और ब्लॉक (प्रखंड कार्यालय) स्तर पर जारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आर-पार का युद्ध लड़ेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी ने स्थानीय लोगों को शराब पिलाकर थाने के बाहर उनके खिलाफ हूटिंग कराई, जो एक विधायक के प्रोटोकॉल और गरिमा का खुला उल्लंघन है. पुलिस एसोसिएशन द्वारा दिए जा रहे बयानों, इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग को उन्होंने कानूनी रूप से ‘बेतुका’ करार दिया. उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि वे किसी भी कीमत पर माफी नहीं मांगेंगे. उन्होंने कहा, “माफी मांगना तोपचांची की उस ‘लालखंड’ की पवित्र मिट्टी का अपमान होगा, जिसने विनोद बिहारी महतो, शिबू सोरेन और शिवा महतो जैसे गर्जना करने वाले महान नेताओं को जन्म दिया है. हमें सिर कट जाना मंजूर है, लेकिन इस मिट्टी के स्वाभिमान को झुकने नहीं देंगे.”



