रांची: झारखंड अब अपनी अर्थव्यवस्था को सिर्फ कोयला उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय क्रिटिकल और हाई-वैल्यू मिनरल्स की ओर ले जाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। खनिजों की खोज और संभावित भंडार की पहचान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
रांची के रेडिसन ब्लू होटल में बुधवार को आयोजित 30वीं झारखंड राज्य भूतात्विक कार्यक्रम पर्षद की बैठक में राज्य के खनिज क्षेत्र की भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई। इस दौरान अरवा राजकमल ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात में झारखंड के सामने खनिज क्षेत्र में नई संभावनाओं को तलाशने की जरूरत है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के साथ उच्च मूल्य वाले खनिजों के दोहन पर जोर दिया।
बैठक के दौरान जियोलॉजी और माइनिंग क्षेत्र में AI और ML के उपयोग को लेकर तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों की मदद से भू-वैज्ञानिक आंकड़ों का विश्लेषण, खनिज संभावनाओं का आकलन, माइन प्लानिंग और नए खनिज क्षेत्रों की पहचान ज्यादा प्रभावी तरीके से की जा सकती है।
कोयले पर निर्भरता घटाकर नए खनिजों पर नजर
अरवा राजकमल ने कहा कि झारखंड अभी कोयला उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, लेकिन लंबे समय तक अर्थव्यवस्था को केवल कोयले के भरोसे नहीं चलाया जा सकता। आने वाले समय में कोयला उत्पादन एक स्तर तक पहुंचने के बाद घट भी सकता है। ऐसे में राज्य को अभी से कोयले के बाद की अर्थव्यवस्था की तैयारी शुरू करनी होगी।
उन्होंने कहा कि दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन को लेकर नीतियां तेजी से बदल रही हैं। कई देश कम कार्बन वाले उत्पादन और पर्यावरण के अनुकूल खनन पर ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में झारखंड के लिए क्रिटिकल और हाई-वैल्यू मिनरल्स के साथ टिकाऊ खनन को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि बीते कुछ महीनों में अमेरिका और कनाडा सहित कई देशों के प्रतिनिधियों की झारखंड के खनिज क्षेत्र में दिलचस्पी बढ़ी है। ऑस्ट्रेलिया और जर्मन अंतरराष्ट्रीय सहयोग संस्था के साथ भी सहयोग की संभावनाओं पर काम हो रहा है। इसके अलावा विश्व आर्थिक मंच की ओर से एडवांस्ड मैटेरियल के क्षेत्र में रिसर्च सेंटर स्थापित करने को लेकर भी चर्चा चल रही है।
अन्वेषण से नीलामी तक प्रक्रिया सरल बनाने की तैयारी
राहुल सिन्हा ने कहा कि झारखंड लंबे समय से देश और विदेश के उद्योगों तथा पावर प्लांटों को खनिज उपलब्ध कराता रहा है। अब राज्य को अगले 10, 20 वर्षों और उससे आगे की जरूरतों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक नीति तैयार करनी होगी।
उन्होंने बताया कि खनन प्रक्रिया की शुरुआत भू-वैज्ञानिक अन्वेषण से होती है। यदि अन्वेषण और रिपोर्ट तैयार करने के दौरान ही वन क्षेत्र, जमीन, सीमांकन और पर्यावरण से संबंधित संभावित अड़चनों की पहचान कर ली जाए, तो बाद में खनिज ब्लॉक की नीलामी और माइनिंग लीज की प्रक्रिया को काफी आसान बनाया जा सकता है।
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई। लिथियम, यूरेनियम, टाइटेनियम और वैनेडियम जैसे खनिजों की संभावनाओं का पता लगाने पर जोर दिया गया।
AI की मदद से पुराने और नए भू-वैज्ञानिक डाटा को कम समय में प्रोसेस और एनालाइज किया जा सकता है। इससे संभावित खनिज क्षेत्रों की पहचान करने के साथ-साथ बेहतर अन्वेषण रिपोर्ट तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
15 खनिज ब्लॉक नीलामी के लिए तैयार
बैठक में राज्य में नीलामी के लिए तैयार खनिज ब्लॉकों की भी जानकारी साझा की गई। सक्षम प्राधिकार से अनुमति मिलने के बाद खान एवं भूतत्व निदेशालय (DMG), झारखंड ने 15 प्रमुख खनिज ब्लॉकों को नीलामी के लिए तैयार किया है।
इनमें रांची का चुरी लाइमस्टोन ब्लॉक, रामगढ़ के हरिहरपुर-लेम-बिचा लाइमस्टोन और पियरतांड़ लाइमस्टोन ब्लॉक शामिल हैं। पूर्वी सिंहभूम का गोल्ड ब्लॉक और सरायकेला-खरसावां के कई गोल्ड ब्लॉक भी सूची में हैं।
इसके अलावा गिरिडीह के गंसासार-लुप्पी बेस मेटल ब्लॉक और बरगंडा कॉपर ब्लॉक को भी नीलामी के लिए तैयार किया गया है। पश्चिमी सिंहभूम के घटकुरी आयरन ओर ब्लॉक-II, घटकुरी-I आयरन ओर ब्लॉक, अजीताबुर आयरन एंड मैंगनीज ब्लॉक और बंधबुरू आयरन ओर ब्लॉक भी इसमें शामिल हैं।
खनन शुरू होने से पहले बंद करने की योजना भी जरूरी
राहुल सिन्हा ने कहा कि किसी खदान की शुरुआत के साथ ही उसके फाइनल माइन क्लोजर प्लान पर भी काम किया जाना चाहिए। खनन समाप्त होने के बाद क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन कैसे बहाल होगा और स्थानीय लोगों के हित किस तरह सुरक्षित रहेंगे, इसकी योजना पहले से तैयार रहनी चाहिए।
इससे खनन के बाद पर्यावरण और स्थानीय आबादी पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।
AI-ML से खनिज अन्वेषण में आएगा बदलाव
तकनीकी सत्र में आईएसएम धनबाद, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), निजी क्षेत्र और अन्य संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों ने AI आधारित खनिज अन्वेषण और मिनरल प्रॉस्पेक्टिविटी पर प्रस्तुतियां दीं।
विशेषज्ञों ने माइन प्लानिंग सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल और सक्रिय खनन क्षेत्रों की पहचान में AI-ML की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी। अधिकारियों और युवा भू-वैज्ञानिकों से आधुनिक तकनीक को अपनाने और झारखंड में खनिज अन्वेषण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की अपील की गई।
तीन क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक की भी होगी नीलामी
केंद्र सरकार के खान मंत्रालय की ओर से झारखंड के तीन क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉकों की नीलामी प्रस्तावित है। इनमें पलामू का रेवारातू ग्रेफाइट ब्लॉक, लोहरदगा का सिसकरी पाट बॉक्साइट-टाइटेनियम एवं एसोसिएटेड मिनरल ब्लॉक और पलामू का अधमानिया ग्रेफाइट एवं वैनेडियम ब्लॉक शामिल है।
इन ब्लॉकों की नीलामी से राज्य में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और उत्पादन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इससे झारखंड को पारंपरिक कोयला आधारित खनन से आगे बढ़कर भविष्य की खनिज जरूरतों के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।



