जमशेदपुर: एमजीएम अस्पताल में इलाज कराने वाले हृदय रोगियों के लिए राहत की खबर है। अस्पताल में जल्द ही कैथ लैब की सुविधा शुरू होने जा रही है। इससे गंभीर हृदय रोगियों को जांच और उपचार के लिए दूसरे शहरों के अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने इसके लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है और अस्पताल प्रबंधन ने आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कैथ लैब की स्थापना के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से करीब 10 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करायी गयी है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद काम आगे बढ़ाया जाएगा।
छठी मंजिल पर बनेगी कैथ लैब
एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने मंगलवार को बताया कि प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद अब टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अस्पताल की छठी मंजिल पर कैथ लैब स्थापित की जाएगी।
शुरुआत में यहां 18 बेड की व्यवस्था होगी। इसका उद्देश्य जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों के हृदय रोगियों को अस्पताल में ही आवश्यक जांच और इलाज उपलब्ध कराना है।
एंजियोग्राफी के साथ ब्लॉकेज का इलाज भी संभव
कैथ लैब शुरू होने के बाद हृदय की रक्त वाहिकाओं की जांच के लिए कोरोनरी एंजियोग्राफी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं की जा सकेंगी। मरीज की स्थिति के अनुसार इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी से जुड़ी प्रक्रियाओं के जरिए धमनियों में मौजूद ब्लॉकेज का उपचार भी किया जा सकेगा।
इस सुविधा से गंभीर मरीजों की जांच और उपचार में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है।
हर दिन दो से तीन मरीज हो रहे रेफर
वर्तमान में एमजीएम अस्पताल में कैथ लैब नहीं होने के कारण गंभीर हृदय रोगियों को बेहतर इलाज के लिए रिम्स, रांची या अन्य बड़े अस्पतालों में भेजना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, रोजाना करीब दो से तीन हृदय रोगियों को रेफर किया जाता है।
कैथ लैब के शुरू होने के बाद इन मरीजों को कई जरूरी हृदय संबंधी सेवाएं एमजीएम में ही मिल सकेंगी। खासकर हार्ट अटैक जैसी आपात स्थिति में मरीज को दूसरे शहर ले जाने की जरूरत कम होगी और इलाज शुरू करने में महत्वपूर्ण समय बच सकता है।
हृदय रोग विभाग की क्षमता बढ़ने की उम्मीद
एमजीएम अस्पताल में फिलहाल हार्ट रोगों के इलाज के लिए एक स्थायी चिकित्सक तैनात हैं। इसके अलावा आयुष्मान योजना के तहत दो डॉक्टर भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कैथ लैब शुरू होने के बाद अस्पताल की कार्डियक सेवाओं का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। इससे न केवल मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार मिल सकेगा, बल्कि गंभीर मामलों में समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।



