रांची: झारखंड में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र से मिले करोड़ों रुपये के इस्तेमाल में जिलों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) के तहत राज्य को मिले 125 करोड़ रुपये में से अब तक सिर्फ 34.93 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके हैं। वहीं, 90 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अभी भी बैंकों और कोषागारों में पड़ी हुई है।
जिलों की ओर से समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) उपलब्ध नहीं कराने के कारण केंद्र से योजना की अगली किस्त मिलने में भी परेशानी हो रही है। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अब स्वास्थ्य विभाग ने उपायुक्तों को मामले में हस्तक्षेप कर लंबित भुगतान की प्रक्रिया तेज कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।
125 करोड़ के फंड में सिर्फ 28 फीसदी खर्च
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की 25 अगस्त 2026 तक की जिला-वार समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, PM-ABHIM के तहत झारखंड को कुल 125 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इसमें से सिर्फ 34.93 करोड़ रुपये यानी करीब 28 फीसदी राशि ही खर्च हो सकी है।
रिपोर्ट के मुताबिक करीब 90.10 करोड़ रुपये अब भी खर्च होने का इंतजार कर रहे हैं। राज्य के 24 जिलों में से 20 जिलों में योजना के तहत भुगतान का आंकड़ा शून्य है। इसका असर अस्पतालों में उपलब्ध कराई जाने वाली जांच और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी पड़ रहा है।
रांची सबसे आगे, मुख्यालय का प्रदर्शन भी बेहतर
फंड खर्च करने के मामले में रांची जिला अन्य जिलों की तुलना में आगे है। रांची को 7.50 करोड़ रुपये का आवंटन मिला था, जिसमें से 3.06 करोड़ रुपये यानी करीब 41 फीसदी राशि खर्च की जा चुकी है।
वहीं राज्य मुख्यालय को मिले 48.03 करोड़ रुपये में से 31.25 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जो करीब 65 फीसदी है। अन्य जिलों में लोहरदगा ने 20 फीसदी, गुमला ने 15 फीसदी और पूर्वी सिंहभूम ने करीब 3 फीसदी राशि खर्च की है।
इन 20 जिलों में खर्च का आंकड़ा शून्य
PM-ABHIM के तहत राज्य के 20 जिलों में अब तक एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया गया है। इनमें बोकारो, चतरा, देवघर, धनबाद, दुमका, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, हजारीबाग, जामताड़ा, खूंटी, कोडरमा, लातेहार, पलामू, पाकुड़, रामगढ़, साहिबगंज, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम शामिल हैं।
इन जिलों के लिए कुल 61.65 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, लेकिन अब तक इस राशि से कोई भुगतान नहीं हुआ है।
भुगतान अटकने से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
योजना के तहत प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर बनाने, शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के लिए जरूरी मेडिकल उपकरण और दवाएं उपलब्ध कराने तथा प्रयोगशालाओं में मुफ्त ब्लड टेस्ट और एक्स-रे जैसी सुविधाएं मजबूत करने की योजना है।
लेकिन फंड का समय पर इस्तेमाल नहीं होने के कारण कई स्तरों पर भुगतान लंबित है। इससे संबंधित एजेंसियों और वेंडरों के बिल भी अटक गए हैं। इसका असर अस्पतालों में जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर पड़ रहा है।
15 दिन में भुगतान पूरा करने का निर्देश
मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र भेजकर प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप करने को कहा है। वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सभी सिविल सर्जनों को लंबित भुगतान जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है।
सिविल सर्जनों को 15 दिनों के भीतर भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि तकनीकी कारणों से संबंधित एजेंसियां भुगतान नहीं कर पा रही हैं, तो सिविल सर्जन बतौर एकाउंट ऑफिसर नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित करेंगे।
जिम्मेदार अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही
स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि योजना की राशि का समय पर इस्तेमाल नहीं होना गंभीर मामला है। फंड उपलब्ध होने के बावजूद भुगतान प्रक्रिया शुरू नहीं होने से सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि करोड़ों रुपये उपलब्ध होने के बावजूद 20 जिलों में भुगतान शुरू नहीं होना चिंता का विषय है। इससे आम लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने सभी सिविल सर्जनों की जवाबदेही तय किए जाने की बात कही है।



