जसीडीह बाईपास ब्रॉड गेज रेल लाइन को कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी की मंजूरी मिल गई है, जिससे देवघर और संथाल परगना के रेल यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। यह 4.9 किलोमीटर लंबी लाइन ₹293.67 करोड़ की लागत से बनी है।
रांची। देवघर और संथाल परगना क्षेत्र के रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी राहतभरी खबर सामने आई है। पूर्व रेलवे के अंतर्गत निर्मित 4.905 किलोमीटर लंबी जसीडीह बाईपास ब्रॉड गेज रेल लाइन को कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की मंजूरी मिलने के बाद अब इस पर ट्रेनों के परिचालन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। 293.67 करोड़ की लागत वाली यह महत्वपूर्ण परियोजना देवघर लिंक केबिन को सीधे कुमराबाद रोहिणी स्टेशन से जोड़ती है। रेल सुरक्षा आयुक्त (CRS) गुरु प्रकाश ने अपनी टीम के साथ इस नई रेल लाइन का कड़ाई से निरीक्षण किया। उन्होंने कुमराबाद रोहिणी से देवघर लिंक केबिन तक मोटर ट्रॉली से पूरे सेक्शन का जायजा लिया और केबिन के पास गेज की माप कराई।इसके बाद किए गए सफल स्पीड ट्रायल में भी ट्रैक पूरी तरह खरा उतरा। इस दौरान पूर्व रेलवे के मुख्य प्रशासनिक पदाधिकारी (कंस्ट्रक्शन) मनोज खान और डीआरएम संघर्ष मौर्य समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सीआरएस की औपचारिक रिपोर्ट मिलते ही इस माह के अंत तक नियमित ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।समय की बचत और बड़े बदलाव
इस बाईपास के शुरू होने से ट्रेनों के संचालन में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
- इंजन रिवर्सल से मुक्ति: आसनसोल/हावड़ा और दुमका, बांका या गोड्डा के बीच चलने वाली ट्रेनों को अब दिशा बदलने के लिए जसीडीह जंक्शन पर रुकना नहीं पड़ेगा। इससे यात्रियों के 35 से 45 मिनट तक की भारी बचत होगी।
- जंक्शन पर घटेगा दबाव: जसीडीह स्टेशन पर प्लेटफॉर्म खाली न मिलने के कारण ट्रेनों को आउटर सिग्नल पर खड़े रहने की समस्या खत्म होगी, जिससे मुख्य लाइन की अन्य ट्रेनों का संचालन भी सुगम होगा।
- रफ्तार और क्षमता: नए ट्रैक पर ट्रेनों को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की मंजूरी दी गई है। साथ ही, कुमराबाद रोहिणी हॉल्ट को पूर्ण ब्लॉक स्टेशन और देवघर लिंक केबिन को समर्पित कंट्रोलिंग स्टेशन बनाया गया है।
- इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट नमूना: इस दुर्गम निर्माण कार्य में 1.34 लाख घन मीटर कठोर चट्टानों को विशेष केमिकल तकनीक से काटा गया। इसके अलावा, मौजूदा जसीडीह-बैद्यनाथ धाम लाइन के नीचे एक आरसीसी बॉक्स रेल-अंडर-रेल पुल का निर्माण किया गया है। पूरे ट्रैक पर 25 kV AC ओवरहेड सिस्टम से पूर्ण विद्युतीकरण का कार्य भी पूरा हो चुका है।
पर्यावरण संरक्षण का भी रखा गया ध्यान
इस परियोजना के निर्माण के दौरान लगभग 300 पेड़ काटने पड़े थे। इसकी भरपाई के लिए रेलवे ने राज्य सरकार को पांच गुना अधिक पौधारोपण हेतु राशि का भुगतान किया है, साथ ही रेलवे खुद भी करीब 1500 नए पौधे लगा रहा है ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे।
संथाल में कनेक्टिविटी विस्तार
जसीडीह बाईपास के अलावा इस क्षेत्र में रेलवे बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी तेजी से काम चल रहा है:
मधुपुर बाईपास लाइन: मधुपुर-गिरिडीह रूट पर इंजन रिवर्सल की समस्या को दूर करने के लिए ₹106 करोड़ की लागत से 7.5 किलोमीटर लंबी बाईपास लाइन का निर्माण किया जा रहा है, जिसके नवंबर-दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
पिरपैंती-जसीडीह नई लाइन: 97 किलोमीटर लंबी और ₹2700 करोड़ की इस महती परियोजना का लगभग 38 किलोमीटर हिस्सा चालू किया जा चुका है, जबकि शेष भागों के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य प्रगति पर है।



