पूर्व सांसद आनंद मोहन ने रांची में कमजोर विपक्ष, नीतीश कुमार के केंद्र जाने के फैसले और अनंत सिंह पर हुई कार्रवाई पर अपनी बेबाक राय रखी. जानिए उनकी पूरी बात.
पूर्व सांसद आनंद मोहन रविवार को रांची पहुंचे. यहां उनके बड़े बेटे चेतन आनंद के तीसरे पाटलिपुत्र गन शूटिंग रेंज का उद्घाटन हुआ. इस अवसर पर आनंद मोहन और उनकी पत्नी बेटे को आशीर्वाद देने रांची आए. प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने बिहार और झारखंड की राजनीति, विपक्ष की भूमिका, नीतीश कुमार के फैसले और अनंत सिंह पर हुई कार्रवाई को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष, दोनों की भूमिका जरूरी है. जिस देश में प्रतिपक्ष कमजोर होगा, वहां तानाशाही का खतरा मंडराने लगेगा
कमजोर प्रतिपक्ष लोकतंत्र के लिए खतरा
आनंद मोहन ने कहा कि झारखंड, बिहार या राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिपक्ष की भूमिका से वह संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने महसूस किया है कि प्रतिपक्ष कमजोर है. लोकतंत्र की सफलता सत्ता और विपक्ष दोनों की मजबूत भूमिका पर निर्भर करती है. वह चाहेंगे कि देश के हर राज्य और केंद्र में मजबूत प्रतिपक्ष हो.
नीतीश कुमार के केंद्र जाने के फैसले से असंतुष्ट
नीतीश कुमार के केंद्र की राजनीति में जाने के फैसले पर आनंद मोहन ने कहा कि वह इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने बताया कि उस समय भी उन्होंने नीतीश कुमार से कहा था कि अगर यह फैसला उनका भी है, तब भी वह इससे असंतुष्ट हैं. बिहार में तीन महीने भी नहीं हुए और वह केंद्र चले गये. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार विकास की ओर आगे बढ़ा.
झारखंड को बताया बिहार का विभाजन
झारखंड के विकास पर सवाल उठाते हुए आनंद मोहन ने कहा कि अलग राज्य बनने के बाद यहां वैसा विकास नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि झारखंड पूंजीपतियों और नेताओं के लूट का अड्डा बन गया है. जब भी वह झारखंड आते हैं, बेबाकी से अपनी बात रखते हैं. उनका कहना है कि झारखंड का निर्माण नहीं हुआ, बल्कि बिहार का विभाजन हुआ है. झारखंड में आदिवासी बहुल ओडिशा, बिहार और बंगाल का क्षेत्र शामिल नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब झारखंड में खनिज से लेकर कृषि तक सब कुछ है, तो फिर यह राज्य उन सपनों के अनुरूप कहां पहुंच पाया है.
सम्राट चौधरी की नीतीश कुमार से तुलना नहीं होनी चाहिए
बिहार में सत्ता परिवर्तन और मुख्यमंत्री के विकल्प को लेकर आनंद मोहन ने कहा कि जब भाजपा सत्ता में आयी और राजतिलक की तैयारी चल रही थी, तब भी उन्होंने कहा था कि अगर भाजपा ही सही विकल्प है, तो सम्राट चौधरी बेहतर विकल्प होंगे. हालांकि, उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी का अनुभव, उम्र और कद नीतीश कुमार के बराबर नहीं है. नीतीश कुमार से उनकी तुलना नहीं करनी चाहिए. नीतीश कुमार इतने अनुभवी हैं कि उनकी तुलना किसी नौसिखिए से नहीं होनी चाहिए.
अनंत सिंह पर कार्रवाई को बताया बदले की भावना
अनंत सिंह पर कार्रवाई को लेकर आनंद मोहन ने कहा कि कार्रवाई करने वालों को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए. अनुशासन तोड़ने वाले कई लोग हैं. कोई और टुडे है, तो उसे राज्यमंत्री का दर्जा दिया जाता है, जबकि अनंत सिंह पर अनुशासन की कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने इसे बदले की भावना बताया. आनंद मोहन ने कहा कि अनंत सिंह आज की तारीख में अपने समाज के हीरो हैं. संजय झा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वह उनके घुटने के बराबर नहीं हैं और वह उनकी चर्चा नहीं करना चाहते.
रोहिणी आचार्य को बताया बच्ची, बांकीपुर के नतीजे पर भी बोले
रोहिणी आचार्य को लेकर आनंद मोहन ने कहा कि वह बच्ची हैं, बेचारी हैं. उन्होंने एमएलसी चुनाव और बांकीपुर के नतीजों पर कहा कि किसी को भ्रम पालने की जरूरत नहीं है. बांकीपुर से लेकर एमएलसी चुनाव तक कई फैक्टर काम कर रहे थे. इनमें यूजीसी, जेन-जी और आनंद मोहन को सुप्रीम कोर्ट में घसीटना भी शामिल था.
उन्होंने कहा, ‘तू किसी और से ना हारेगा, तुझे तेरा अहंकार मारेगा.’ आनंद मोहन ने कहा कि बांकीपुर में यही हुआ. वहां भाजपा के अंदर की ताकत भी उसे हराने में लगी हुई थी.
एनडीए और जदयू के आत्ममंथन की जरूरत
आनंद मोहन ने कहा कि आज एनडीए और जदयू को आत्ममंथन करने की जरूरत है।. उन्होंने राजनीतिक परिस्थितियों और हालिया चुनावी नतीजों को लेकर भी अपनी बात रखी.



