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Atal Bharat News > झारखंड > बाबूलाल मरांडी का वित्त मंत्री को जवाब, बोले- दिल्ली नहीं, रांची की नीतियों से हो रहा झारखंड को नुकसान

बाबूलाल मरांडी का वित्त मंत्री को जवाब, बोले- दिल्ली नहीं, रांची की नीतियों से हो रहा झारखंड को नुकसान

AMRIT RAJ
Last updated: 2026/08/28 at 1:27 PM
AMRIT RAJ
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बाबूलाल मरांडी ने वित्त मंत्री को जवाब देते हुए हेमंत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि राज्य को आर्थिक नुकसान दिल्ली की नीतियों से नहीं, बल्कि रांची की कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार से हो रहा है.

MMDR Bill Dispute: झारखंड विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के उस पत्र का जवाब दिया है, जिसमें उन्होंने एमएमडीआर (खनिज एवं खनिज विकास एवं विनियमन) कानून में संशोधन के बाद राज्य को होने वाले संभावित राजस्व नुकसान का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से राज्य के हित में समर्थन की अपील की थी.

Contents
केंद्र से झारखंड को हक मांगना गलत नहीं: बाबूलालपूरे देश में लागू है एमएमडीआर संशोधनसभी राज्यों में कानून समान रूप से लागूसेस बढ़ाया, लेकिन रॉयल्टी घट गईभारी उपकर से खनन क्षेत्र प्रभावितबीसीसीएल-सीसीएल के उत्पादन में पहली बार गिरावटअवैध खनन को मिला बढ़ावापड़ोसी राज्यों का दिया उदाहरणबालू और पत्थर घाटों की नीलामी पर सवालडीएमएफटी फंड के इस्तेमाल पर भी उठाए सवालमुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी पत्र लिखने की सलाहझारखंड सरकार को करना होगा आत्ममंथन

केंद्र से झारखंड को हक मांगना गलत नहीं: बाबूलाल

बाबूलाल ने अपने जवाबी पत्र में कहा कि केंद्र से झारखंड का जायज हक मांगना गलत नहीं है, लेकिन जिस आर्थिक नुकसान की बात सरकार कर रही है, उसकी वजह दिल्ली नहीं बल्कि रांची की नीतियां हैं. उन्होंने सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन, खनन नीति की विफलता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए पहले अपनी नीतियों की समीक्षा जरूरी है.

पूरे देश में लागू है एमएमडीआर संशोधन

बाबूलाल मरांडी ने पत्र में लिखा कि वित्त मंत्री की झारखंड के आर्थिक हितों को लेकर चिंता स्वागत योग्य है, लेकिन एमएमडीआर कानून में संशोधन किसी एक राज्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में समान रूप से लागू किया गया है.

सभी राज्यों में कानून समान रूप से लागू

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह कानून सभी राज्यों पर समान रूप से लागू है, तो केवल झारखंड सरकार को ही इससे सबसे अधिक परेशानी क्यों दिखाई दे रही है. उन्होंने कहा कि इससे सरकार की नीयत और उसकी नीतियों पर सवाल खड़े होते हैं.

सेस बढ़ाया, लेकिन रॉयल्टी घट गई

बाबूलाल ने दावा किया कि राज्य सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाने के लिए सेस से होने वाली आय का हवाला दे रही है, जबकि वास्तविक तस्वीर अलग है. उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष उपकर (सेस) से करीब 7,500 करोड़ रुपये की आय हुई, लेकिन उसी अवधि में सरकार का 22,000 करोड़ रुपये का खनन रॉयल्टी का बजटीय अनुमान घटकर लगभग 16,000 करोड़ रुपये रह गया. उनके अनुसार इसका मतलब है कि राज्य को करीब 6,000 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने एक हाथ से कमाया और दूसरे हाथ से उससे ज्यादा गंवा दिया.

भारी उपकर से खनन क्षेत्र प्रभावित

प्रतिपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि सरकार ने कोयले पर 450 रुपये प्रति टन और लौह अयस्क पर 600 रुपये प्रति टन का अत्यधिक उपकर लगाकर झारखंड के खनिज बाजार की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमजोर कर दी. उन्होंने कहा कि इसका असर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों सीसीएल और बीसीसीएल के उत्पादन पर भी पड़ा है.

बीसीसीएल-सीसीएल के उत्पादन में पहली बार गिरावट

उन्होंने कहा कि पहली बार सीसीएल और बीसीसीएल के उत्पादन में भारी गिरावट देखने को मिल रही है. बाबूलाल ने दावा किया कि इसका सबसे अधिक नुकसान स्थानीय आदिवासी मजदूरों और खनन क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों को हुआ है, जिनकी आजीविका प्रभावित हुई है.

अवैध खनन को मिला बढ़ावा

उन्होंने आरोप लगाया कि वैध खनन पर अधिक आर्थिक बोझ डालने से अवैध खनन को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिला है. उनके अनुसार वैध खनिज महंगा होने से अवैध खनिज अपेक्षाकृत सस्ता पड़ रहा है. इससे सरकार की पूरी राजस्व व्यवस्था प्रभावित हो रही है और राजस्व संग्रह में गिरावट आ रही है.

पड़ोसी राज्यों का दिया उदाहरण

बाबूलाल ने कहा कि झारखंड को पड़ोसी राज्यों से सीख लेनी चाहिए. उन्होंने दावा किया कि वहां खनिज राजस्व लगातार बढ़ रहा है, जबकि झारखंड में स्थिति उलट दिखाई दे रही है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एमएमडीआर संशोधन केवल प्रमुख खनिजों पर लागू होता है. लघु खनिजों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता.

बालू और पत्थर घाटों की नीलामी पर सवाल

पत्र में बाबूलाल मरांडी ने सरकार से पूछा कि यदि लघु खनिज एमएमडीआर संशोधन से प्रभावित नहीं हैं, तो राज्य में बालू घाटों और पत्थर खदानों की नीलामी समय पर क्यों नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि इस सवाल का जवाब सरकार को जनता के सामने रखना चाहिए, क्योंकि इससे भी राजस्व प्रभावित हो रहा है.

डीएमएफटी फंड के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल

प्रतिपक्ष के नेता ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) के फंड को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने दावा किया कि डीएमएफटी के तहत राज्य को करीब 19,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई, लेकिन इस धन का सही उपयोग नहीं हुआ और इसका बंदरबांट किया गया. उन्होंने पूछा कि इस वित्तीय कुप्रबंधन के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है.

मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी पत्र लिखने की सलाह

बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र के अंत में वित्त मंत्री को सलाह देते हुए कहा कि यदि वे वास्तव में राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित हैं, तो उन्हें मुख्यमंत्री और राज्य के सभी मंत्रियों को भी वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पत्र लिखना चाहिए.

झारखंड सरकार को करना होगा आत्ममंथन

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से अधिकार मांगने के साथ-साथ राज्य सरकार को अपनी नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों पर भी गंभीरता से आत्ममंथन करना होगा, तभी झारखंड की आर्थिक स्थिति में वास्तविक सुधार संभव होगा.

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