माओवादी सेंट्रल कमेटी सदस्य असीम मंडल, जिस पर 2.20 करोड़ रुपये का इनाम था, ने कोलकाता एसटीएफ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। 2011 में किशन जी की मौत के बाद उसे बंगाल में संगठन की जिम्मेदारी मिली थी।
माओवादियों का सेंट्रल कमेटी सदस्य सह 2.20 करोड़ रुपये के इनामी असीम मंडल का चेहरा व आचरण कुख्यात रहा है। कोलकाता एसटीएफ के सामने आत्मसमर्पण करने वाले असीम मंडल को वर्ष 2011 में माओवादी नेता किशन की मौत के बाद बंगाल में संगठन की जिम्मेदारी मिली थी।
बंगाल के ही पश्चिमी मेदिनीपुर जिले का रहने वाला असीम मंडल का माओवादी इतिहास भी दशकों पुराना है। वर्ष 1980 के दशक में वह कॉलेज में था। कॉलेज के दिनों में ही वह माओवादी गतिविधियों से जुड़ा, हथियार उठाया और माओवादियों के दस्ते में शामिल हो गया। इसके बाद वह माओवादी गतिविधियों में शामिल होता गया।
किशन की मौत के बाद बंगाल में जिम्मेदारी मिलने के बाद वह पूरी तरह सक्रिय हो गया। अब सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश में जुट गई। पूर्व में वह झारखंड में सक्रिय रहे सभी पोलित ब्यूरो सदस्य व सेंट्रल कमेटी सदस्यों के साथ मिलकर सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने की गतिविधियों में शामिल रहा। बड़े पैमाने पर लेवी उस तक पहुंच रही थी।
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बता दें कि, झारखंड से माओवादियों का सफाया हो चुका है, जो बचे-खुचे हैं वे दूसरे राज्यों में भाग रहे हैं। इन्हीं भागे हुए माओवादियों में झारखंड का इकलौता एक करोड़ के इनामी माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ तिमिर उर्फ मनोज उर्फ दीपक उर्फ राकेश ने गुरुवार को कोलकाता एसटीएफ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।
उसके विरुद्ध ओडिशा सरकार ने भी 1.20 करोड़ रुपये का इनाम रखा था। यानी कुल मिलाकर उसपर 2.20 करोड़ रुपये का इनाम था। वह मूल रूप से पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के उत्तर फुलचुक का रहने वाला था।



