मुजफ्फरपुर में टूरिस्ट परमिट की आड़ में सैकड़ों लंबी दूरी की बसें अवैध रूप से चल रही हैं, जिससे यात्रियों की जान जोखिम में है। ये बसें सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर सालाना अरबों का कारोबार कर रही हैं।
मुजफ्फरपुर। टूरिस्ट परमिट के नामपर यात्रियों को ढोने के लिए मात्र एक बस नहीं हैं। केवल मुजफ्फरपुर से ही रोजाना दो से अधिक लंबी दूरी की बसें टूरिस्ट परमिट की आड़ लेकर अरबों का सालाना करोबार कर रही हैं।
कमाई के फेर में सुरक्षा मानकों से खिलवाड़ करते हुए जिंदगियां दांव पर लगा रहे हैं। इन अनियमितताओं और अवैध परिचालन को रोकने की जिममेदारी वाले विभाग जुर्माना लगाकर बस संचालकों को अरबों का कारोबार करने का एक तरीके से परमिट दे रहे हैं।
कुछ लाख का जुर्माना लगाकर इन बसों को फिर सड़क पर चलने के लिए छोड़ दिया जा रहा है। इनमें नोएडा से महोबा जाने वाली बस भी शामिल है। टूरिस्ट परमिट पर चलने वाली इस बस में आग लगने से नौ लोगों की जलकर मौत हो गई।
मुजफ्फरपुर आरटीओ से 258 बसों को टूरिस्ट परमिट जारी किया गया है। इनमें से अधिकतर बसों का स्टेज कैरिज के रूप में ही परिचालन हो रहा है। शहर से रोजाना 200 के बसें दूसरे राज्यों के लिए चलती हैं।
इनमें से अधिकतर टूरिस्ट परमिट पर ही चलती हैं। 50 सीट वाली इन बसों में एक यात्री से दो से ढाई हजार किराया लिया जाता है।एक साल करीब सात सौ करोड़ का करोबार इन बसों से होता है।
दूसरी ओर अवैध रूप से चलने वाली इन बसों से जनवरी से अब तक जुर्माना के रूप में 51 लाख 15 हजार 198 रुपये वसूले गए। नोएडा से महोबा जा रही बस पर भी 19 चालान से 1.75 लाख जुर्माना हुआ। यही बस नौ मौतों का जिम्मेदार हुआ। अब सवाल यह उठ रहा कि इसे रोका क्यों नहीं जा रहा।
नहीं होती नियमित रूप से जांच
लंबी दूरी की अधिकतर बसों का परिचालन टूरिस्ट परमिट पर हो रहा है। मुजफ्फरपुर एवं अन्य राज्यों के टूरिस्ट परमिट पर यात्रियों को ढोया जा रहा है। बस संचालक इंट्री शुल्क जमा कर एक राज्य से दूसरे राज्य की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं।
विडंबना यह है कि कई राज्यों के बार्डर से गुजरने के बाद भी कहीं इन पर कार्रवाई नहीं होती। तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त अतुल प्रसाद ने वर्ष 2013 में निर्देश जारी किया था कि टूरिस्ट बसों को परमिट तब दिया जाएगा जब टूरिस्टों की सूची उपलब्ध कराई जाएगी।
डब्बा बन जाता स्लीपर बस, तंग हो जाता रास्ता
बस संचालक अधिक मुनाफा कमाने के लिए बसों के ढांचे में भी मनमाना बदलाव करते हैं। नियमों का उल्लंघन कर बसों को डब्बा बना दिया जाता है। स्लीपर बसों में अधिकतर यह स्थिति रहती है।
अधिक स्लीपर बाक्स बनाने की वजह बसों में आने-जान का रास्ता भी काफी कम होता है। हादसें के समय यात्रियों को सुरक्षित निकलना भी आसान नहीं होता। जबकि यह भी नियम के विरुद्ध है।
यह कहता है नियम
टूरिस्ट परमिट का नियम ही स्पष्ट करता है कि बस को किसी एक समूह, शादी, पार्टी, आफिस टूर, तीर्थ यात्रा या संपूर्ण बुकिंग के तहत एक तय स्थान से दूसरे स्थान के लिए चला सकते हैं। इसमें यात्रियों के नाम भी पहले से तय होते हैं।
दूसरी ओर इस परमिट को लेकर स्टेज कैरिज की तरह बसें चलाई जा रही हैं। यही नहीं अवैध रूप से बसों के माडल में भी परिवर्तन कर दिया जा रहा है। हादसों की एक वजह यह भी होती है।
यही नहीं इन बसों में स्पीड गवर्नर भी शो पीस बन कर रहे गए हैं। डीटीओ प्रियंका सिन्हा भी मानती हैं कि टूरिस्ट परमिट पर किसी वाहन को स्टेज कैरिज या सामान्य यात्री बस का परिचालन अवैध है।
फर्जी यात्रियों के नाम देकर ले रहे परमिट
नियमानुसार टूरिस्ट परमिट में यात्रियों की सूची संबंधित परिवहन प्राधिकार को देनी होती है। कई बस संचालक फर्जी यात्रियों का नाम देकर आल इंडिया टूरिस्ट परमिट लेते हैं।
टूरिस्ट परमिट पर मनमाने तरीके से बसों का परिचालन किया जा रहा है। परमिट उल्लंघन पर दस हजार का जुर्माना का प्रावधान है। जुर्माना देने के बाद भी परिचालन पर रोक नहीं लगती।
‘लंबी दूरी समेत सभी वाहनों की लगातार जांच की जा रही है। नियमों के उल्लंघन पर नियमानुसार जुर्माना भी किया जा रहा है। बसों के ढा़ंचे में गड़बडी, परमिट उल्लंघन समेत अन्य सभी परिवहन नियमों के उल्लंघन के मामले में कई वसों को जुर्माना किया गया है। यह अभियान लगातार चलेगा।’



