झारखंड हाईकोर्ट ने राजरप्पा प्रोजेक्ट के रामगढ़ जमीन मुआवजा विवाद पर बड़ा फैसला सुनाया है. ट्रिब्यूनल का 2018 का फैसला रद्द कर दिया गया है.
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ के राजरप्पा प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित 18.19 एकड़ जमीन के मुआवजा विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए सीसीएल को झटका दिया है. अदालत ने अतिरिक्त न्यायिक आयुक्त-सह-ट्रिब्यूनल, रांची के 2018 के फैसले को रद्द कर दिया और मामले को दोबारा सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल में भेज दिया. न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने कहा कि अपीलकर्ताओं की ओर से पेश किए गए अतिरिक्त दस्तावेज मामले के निष्पक्ष निपटारे के लिए महत्वपूर्ण हैं, इसलिए उन्हें रिकॉर्ड पर लिया जाएगा.
1962 में हुआ था जमीन का अधिग्रहण
यह मामला रामगढ़ जिले के मौजा सेवई स्थित खाता संख्या 83 की 18.19 एकड़ जमीन से जुड़ा है. अपीलकर्ताओं का दावा है कि प्लॉट संख्या 656, 1134 और 1216 की यह रैयती जमीन उनके परिवार की थी, जिसे केंद्र सरकार ने 29 दिसंबर 1962 को कोल बेयरिंग एरिया (अधिग्रहण एवं विकास) अधिनियम, 1957 के तहत राजरप्पा परियोजना के लिए अधिग्रहित किया था. बाद में राष्ट्रीय कोयला विकास निगम (NCDC) का विलय सीसीएल में हो गया और मुआवजा देने की जिम्मेदारी सीसीएल पर आ गई.
परिवार को नौकरी मिली, मुआवजा नहीं
अपीलकर्ताओं ने अदालत को बताया कि मूल दावेदार टिकेंद्र चौधरी के निधन के बाद उनके कानूनी उत्तराधिकारी यह मामला लड़ रहे हैं. उनका कहना था कि अधिग्रहित जमीन के बदले मूल दावेदार को सीसीएल में नौकरी दी गई, लेकिन आज तक जमीन का मुआवजा नहीं मिला. उन्होंने यह भी कहा कि जिला भूमि अधिग्रहण पदाधिकारी ने 1989 में इस जमीन को रैयती मान्यता दी थी और परिवार के पास हुकुमनामा, परचा, जमींदारी रसीद और सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं.
ट्रिब्यूनल ने क्यों खारिज किया था दावा
2018 में ट्रिब्यूनल ने दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि दावेदार आवश्यक ‘फॉर्म-के’ और संबंधित परचा रिकॉर्ड पर पेश नहीं कर सके. हाईकोर्ट में अपील के दौरान परिवार ने अतिरिक्त साक्ष्य के रूप में वही परचा और अन्य दस्तावेज दाखिल किए, जिनके आधार पर इसी खाता और प्लॉट से जुड़े अन्य रैयतों को पहले मुआवजा मिल चुका था.
हाईकोर्ट ने माना महत्वपूर्ण साक्ष्य
अदालत ने आदेश 41 नियम 27 सीपीसी के तहत अतिरिक्त दस्तावेज स्वीकार करते हुए कहा कि अपीलीय स्तर पर ऐसे साक्ष्य तभी लिए जा सकते हैं, जब वे न्यायपूर्ण फैसला देने के लिए जरूरी हों. कोर्ट ने पाया कि उसी खाता और प्लॉट के अन्य दावेदारों के मामलों में यही दस्तावेज निर्णायक साबित हुए थे. साथ ही सीसीएल ने भी अदालत में यह स्वीकार किया कि संबंधित जमीन का अधिग्रहण किया गया था और मूल दावेदार को नौकरी भी दी गई थी.
अब ट्रिब्यूनल करेगा नई सुनवाई
हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल का 29 सितंबर 2018 का फैसला रद्द करते हुए दावा मामला मूल फाइल पर बहाल कर दिया. अदालत ने निर्देश दिया कि ट्रिब्यूनल अतिरिक्त दस्तावेजों को ध्यान में रखकर दोबारा फैसला करेगा. चूंकि मामला काफी पुराना है, इसलिए सभी पक्षों को 29 सितंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे ट्रिब्यूनल में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है और अनावश्यक स्थगन नहीं लेने को कहा गया है.



