संथाल परगना को केंद्र सरकार से चार नए रेल बाईपास की सौगात मिली है, जिससे क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रा का समय बचेगा। इन बाईपास से ट्रेनों के इंजन रिवर्सल की समस्या खत्म होगी, जिससे रेल यातायात सुगम और तेज होगा।
देवघर। कभी रेल कनेक्टिविटी के मामले में हाशिये पर खड़ा संथाल परगना अब रेल मानचित्र पर चमक रहा है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने संथाल परगना को एक-दो नहीं, बल्कि चार-चार रेल बाईपास की सौगात दी है।
एक तरफ जहां बिहार, बंगाल व संथाल के पहले रेल बाईपास का ट्रायल पूरा हो चुका है, वहीं जसीडीह स्थित इस रेल बाईपास का उद्घाटन शीघ्र होगा। साथ ही मधुपुर रेल बाईपास बनकर तैयार है। इस वर्ष दिसंबर तक इसके चालू होने की उम्मीद है। गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दुमका के हंसडीहा व जामा में भी रेल बाईपास को मंजूरी मिल गई है। इससे आने वाले दिनों में इंजन के रिवर्सल का झंझट खत्म होगा और समय की बचत होगी। ये दोनों बाईपास 2028 तक पूरे हो जाएंगे।
हंसडीहा में वाई सेक्शन का होगा बाईपास:
सांसद डॉ. दुबे ने बताया कि हंसडीहा में वाई सेक्शन का रेल बाईपास होगा, जिसका टेंडर हो गया है। दुमका जिले में स्थित हंसडीहा में रेल बाईपास के निर्माण का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र में ट्रेनों के आवागमन को सुगम बनाना है।
हंसडीहा, भागलपुर-बांका, दुमका, गोड्डा और जसीडीह/देवघर की ओर से आने-जाने वाली ट्रेनों के लिए एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। बाईपास के बनने से इंजन के रिवर्सल का झंझट भी खत्म होगा।
जामा-महारो बाईपास से करीब आएंगे हंसडीहा-बासुकीनाथ:
जामा-महारो में रेल बाईपास के बनने से हंसडीहा से बासुकीनाथ तक ट्रेन सीधे पहुंच जाएगी। नई ट्रेनों को नया मार्ग मिलेगा। साथ ही दुमका स्टेशन पर ट्रेनों के इंजन रिवर्सल की समस्या खत्म होगी। इसके निर्माण से जसीडीह-गोड्डा की तरफ से आने-जाने वाली ट्रेनों को दुमका स्टेशन जाए बिना सीधे निकाला जा सकेगा।
वर्तमान में कई ट्रेनों को दुमका स्टेशन ले जाना पड़ता है, जिससे 30 से 45 मिनट का समय बर्बाद होता है। इसके बनने से भागलपुर, गोड्डा, रांची और जसीडीह के बीच का रेल सफर काफी तेज हो जाएगा।
जसीडीह रेल बाईपास ने खोला नया द्वार:
गोड्डा, दुमका और भागलपुर-बांका को जसीडीह रेल बाईपास ने नया द्वार दिया है। अब गोड्डा व दुमका से खुलने वाली ट्रेनों के इंजन को रिवर्सल से मुक्ति मिलेगी। जसीडीह रेल बाईपास देवघर लिंक केबिन से 4.8 किमी का नया रेल ट्रैक है। रांची व हावड़ा जाने वाली ट्रेनों का एक घंटा समय बचेगा।
देवघर, दुमका, गोड्डा और बांका से खुलकर हावड़ा, रांची, धनबाद, गिरिडीह और कोडरमा की ओर जाने-आने वाली ट्रेनों को अब जसीडीह स्टेशन पर इंजन के रिवर्सल की जरूरत नहीं पड़ेगी।
मधुपुर रेल बाईपास से गिरिडीह-कोडरमा जाना होगा आसान:
हावड़ा-पटना मेन रेल लाइन पर स्थित मधुपुर रेल बाईपास का काम नवंबर-दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। 106 करोड़ की योजना में साढ़े सात किमी का नया ट्रैक बिछ रहा है। दो नए स्टेशन बन रहे हैं। दोनों स्टेशन मधुपुर-गिरिडीह रूटलाइन पर हैं। इसके बनने से गिरिडीह-कोडरमा जाने के लिए इंजन का रिवर्सल नहीं होगा।
रेल बाईपास नहीं होने से ही देवघर या जसीडीह के रास्ते इस रूट पर लंबी दूरी की गाड़ियां नहीं चल रही हैं। नया बाईपास बनते ही मथुरापुर स्टेशन से आगे बढ़ते ही गिरिडीह की ओर जाने वाली ट्रेनें मथुरापुर-मधुपुर के बीच नवा पतरो में लिंक केबिन से कटकर नए ट्रैक पर चलकर आगे की ओर बढ़ेंगी।
रेल बाईपास से आशय:
रेल बाईपास एक ऐसी वैकल्पिक रेल लाइन होती है, जो किसी बड़े शहर, भीड़भाड़ वाले मुख्य जंक्शन या शहर के अंदरूनी हिस्सों से ट्रेनों को बचाकर बाहर-बाहर ही निकाल देती है, ताकि मुख्य स्टेशन पर ट्रैफिक का दबाव और ट्रेनों की लेट-लतीफी कम हो सके।



