नरकटियागंज (पश्चिम चंपारण)। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में मानव तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए 44वीं वाहिनी एसएसबी नरकटियागंज ने कमर कस ली है।
मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध की पहचान, रोकथाम और पीड़ितों के सुरक्षित पुनर्वास को लेकर वाहिनी मुख्यालय परिसर में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू की गई।
कार्यशाला में बलकार्मिकों को सीमा पर ड्यूटी के दौरान मानव तस्करी के मामलों को पहचानने और त्वरित कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित किया गया। इसका उद्घाटन कमांडेंट बलवंत सिंह नेगी के मार्गदर्शन में द्वितीय कमान अधिकारी गोविंद कुमार ठाकुर ने किया।
उन्होंने कहा कि मानव तस्करी सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। इस अपराध पर प्रभावी रोक के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों, गैर सरकारी संगठनों और आम जनता के बीच मजबूत समन्वय तथा समय पर कार्रवाई बेहद जरूरी है। संदिग्धों की पहचान और पीड़ितों की सुरक्षा पर फोकस
प्रशिक्षण के दौरान सीमा पार मानव तस्करी के संभावित मामलों की पहचान, पीड़ितों और संदिग्ध अपराधियों को पहचानने की प्रक्रिया तथा पीड़ितों को सुरक्षित तरीके से सहायता और पुनर्वास उपलब्ध कराने के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी गई। यह भी बताया गया कि ड्यूटी के दौरान संदिग्ध गतिविधियों पर किस प्रकार सतर्कता बरतते हुए मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्रवाई की जाए।
विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव और जरूरी जानकारी
कार्यशाला का संचालन ‘प्रयास किशोर सहायता केंद्र सोसाइटी’ के चीफ को-ऑर्डिनेटिंग ऑफिसर जितेंद्र कुमार सिंह और आरती कुमारी ने किया।
विशेषज्ञों ने मानव तस्करी की रोकथाम से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी देते हुए बलकार्मिकों को प्रशिक्षित किया। प्रशिक्षण का उद्देश्य सीमा पर तैनात जवानों की क्षमता बढ़ाना और मानव तस्करी के संभावित मामलों में प्रभावी हस्तक्षेप सुनिश्चित करना रहा।
मौके पर सहायक कमांडेंट रामवीर कुमार, निरीक्षक भूपेंद्र कौर, सहायक उप निरीक्षक कुला रंजन डेका समेत बड़ी संख्या में जवानों ने हिस्सा लिया।



