दरभंगा । सरकार और नेशनल पेमेंट कारपोरेशन आफ इंडिया की ओर से 15 अक्टूबर से 2,000 से अधिक के पी टू एम (व्यक्ति-से-व्यापारी) यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने के निर्णय पर व्यापारी संगठनों और चैंबर आफ कामर्स ने अपनी चिंता व्यक्त की है।
चैंबर आफ कामर्स के दरभंगा प्रमंडलीय अध्यक्ष पवन कुमार सुरेका ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को पत्र लिख कर कहा है कि हाल में ही केंद्र सरकार ने एक व्यापारी विरोधी निर्णय लेते हुए यूपीआइ से भुगतान पर व्यापारियों पर अनावश्यक टैक्स का बोझ लाद दिया है। सरकार का यह निर्णय बिल्कुल गैर जरूरी है। जब सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने का एक अभियान चलाया तो इसी व्यापारी समाज ने बहुत बढ़-चढ़कर सरकार को सहयोग प्रदान किया।
आज इस सरकार ने उसे सहयोग का व्यापारियों को यह दंड दिया है कि यूपीआइ से लेनदेन पर उन पर अनावश्यक रूप से खर्च का बोझ लाद दिया गया है। हम सरकार के इस निर्णय की घोर निंदा करते हैं। आइएमए सदस्य और डीएमसीएच एनिस्थिया विभागाध्यक्ष डा. हरि दामोदर सिंह ने कहा कि यूपीआइ से दो हजार से अधिक खरीदारी पर बिजनेस मैन पर शुल्क लगेगा। वर्तमान में मंहगाई तेजी से बढ़ी है। ऐसे में आमलोगों के अधिक खरीदारी करने पर व्यवसायी वर्ग आनाकानी करेंगे। इससे पब्लिक की परेशानी बढ़ेगी।
शिशुरोग विभागाध्यक्ष डा. रिजवान हैदर ने कहा कि 75 हजार से अधिक की राशि के भुगतान पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये के हरेक लेनदेन पर देना होगी। इससे छोटे दुकानदारों के साथ आमलोग भी प्रभावित होंगे। सरकार को इसे स्पष्ट करते हुए विचार करना चाहिए।
लहेरियासराय स्वर्णकार संघ के सुनील गडाई ने कहा कि दो हजार की शुरुआत राशि बहुत कम है ।इसे बढ़ाकर कम से कम 15 हजार करें।बड़े और छोटे स्वर्ण व्यवसायी को इससे बहुत अधिक नुकसान है ।
हम लोग के यहां छोटा-छोटा पेमेंट करने वाले लोग अधिक होते हैं। इससे बार-बार दुकानदारों का रुपया कटेगा। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। हालांकि बिहार जैसे राज्य में इसे लागू करना कहीं से उचित नहीं है।
व्यापारी संतोष साह, मिथिलेश महासेठ, बैजू पंसारी आदि ने कहा कि थोक व कम मार्जिन वाले व्यापार में 0.4 प्रतिशत का शुल्क मर्चेंट के लाभ को प्रभावित करेगा। बड़ी रकम के भुगतान पर अधिकतम 300 का कैप तय किए जाने के बावजूद मध्यम वर्ग के व्यापारियों पर परिचालन लागत बढ़ेगी।
कहा कि आशंका है कि शुल्क से बचने के लिए कई कारोबारी या ग्राहक दोबारा नकद लेन-देन का रुख कर सकते हैं, जिससे डिजिटल इंडिया अभियान को झटका लग सकता है।



