रजरप्पा मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर अदालत ने सरकार से मांगा पूरा ब्यौरा, फंड की कमी नहीं होने के पुराने बयान पर भी उठाया सवाल
रामगढ़। रजरप्पा स्थित प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर में विकास और आवश्यक सुविधाओं से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत प्रगति रिपोर्ट तलब की है। यह मामला पूर्व में दिए गए न्यायालय के आदेशों के अनुपालन से जुड़ी अवमानना याचिका के रूप में सामने आया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार के रुख में बदलाव को लेकर भी सवाल किए।
फंड को लेकर सरकार के रुख पर सवाल
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि इससे पहले पर्यटन सचिव की ओर से अदालत को बताया गया था कि मंदिर परिसर के विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं है। अब सरकार द्वारा केंद्र की प्रसाद योजना के माध्यम से राशि प्राप्त करने की बात कही जा रही है। इसी अंतर को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
प्रसाद योजना के तहत मांगी जाएगी राशि
राज्य सरकार की ओर से अदालत को जानकारी दी गई कि रजरप्पा मंदिर के विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार की प्रसाद योजना के तहत आर्थिक सहायता मांगी जाएगी। सरकार ने योजना के माध्यम से विकास कार्यों के लिए जरूरी राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही। अदालत ने इसके साथ ही अब तक हुए कार्यों और आगे की योजना का विस्तृत विवरण मांगा है।
उपायुक्त भी अदालत में रहे मौजूद
मामले की सुनवाई के दौरान रामगढ़ के उपायुक्त अदालत में उपस्थित रहे। मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं को लेकर हाईकोर्ट पहले से ही मामले की निगरानी कर रहा है।
आदेशों के पालन को लेकर दायर हुई याचिका
प्रार्थी संजीव कुमार सिंह ने अवमानना याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि जनहित याचिका में पूर्व में दिए गए न्यायालय के निर्देशों का अपेक्षित रूप से पालन नहीं हुआ है। याचिका में मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार तथा श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देशों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
17 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई से पहले मंदिर परिसर के विकास कार्यों की स्थिति, धन की व्यवस्था और पूर्व आदेशों के अनुपालन से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी। उस दिन अदालत सरकार की ओर से प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट के आधार पर आगे की स्थिति की समीक्षा करेगी।



