रांची। झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से जुड़ी दो गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। रांची के मांडर में 35 ग्रामीणों के नाम हटाने के लिए कथित तौर पर गलत दावे पेश किए गए, जबकि जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र में तीन अफगानी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में दर्ज पाए गए। दोनों मामलों ने निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मांडर में 35 ग्रामीणों के नाम हटाने का प्रयास
मांडर प्रखंड के सुरसा गांव स्थित बूथ संख्या 191 पर दो बूथ लेवल एजेंटों (BLA) ने छह सितंबर को 35 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा किए। आवेदनों में इन मतदाताओं को गांव से अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया था।
बीएलओ को दावों पर संदेह हुआ तो उन्होंने ग्रामीणों और अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। भौतिक सत्यापन में सभी 35 मतदाता गांव में ही निवास करते मिले। ग्रामीणों का आरोप है कि फॉर्म स्वीकार करने और हस्ताक्षर करने के लिए बीएलओ पर दबाव बनाया गया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग
मामले के सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई। अंजुमन इस्लामिया कमेटी, सुरसा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने मांडर की सीओ सह सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी चंचला कुमारी और थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। सीओ ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
जमशेदपुर में तीन अफगानी नागरिकों के नाम मिले
दूसरी ओर, जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या 286 की मतदाता सूची में तीन अफगानी नागरिकों के नाम दर्ज होने का मामला सामने आया है। SIR के दौरान दस्तावेजों और भौतिक सत्यापन में इनकी नागरिकता पर सवाल उठे। जांच के बाद तीनों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।
जांच में सामने आया कि आसिल खान, मोहम्मद असलम और मोहम्मद इब्राहिम पिछले करीब 26 वर्षों से गोलमुरी थाना क्षेत्र के टुइलाडुंगरी में किराए पर रह रहे थे। दस्तावेजों की जांच और पासपोर्ट के सत्यापन के बाद उनके अफगानिस्तान के नागरिक होने की बात सामने आई।
DC और SSP को जांच के निर्देश
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने जमशेदपुर के उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। अब यह पता लगाया जा रहा है कि विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल होना महज प्रशासनिक चूक थी या इसके पीछे किसी तरह की सुनियोजित गड़बड़ी थी।



