रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा को लेकर कथित पेपर लीक और अनियमितता के मामले में सीआईडी की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। शुरुआती जांच में प्रश्नपत्र के सीधे लीक होने के ठोस प्रमाण नहीं मिले थे। उस समय अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर रकम वसूलने की बात सामने आई थी। लेकिन आरोपियों से पूछताछ और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है।
अब सीआईडी कॉल डिटेल, डिजिटल साक्ष्य, परीक्षा से जुड़े दस्तावेज और संदिग्धों के बयानों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
अभय तिवारी से पूछताछ के बाद सामने आई नई जानकारी
मामले में टीडीपीएल के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी से पूछताछ को जांच का महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। पूछताछ के दौरान परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्न और उनके उत्तर तैयार कराने की बात सामने आई।
जांच एजेंसी के अनुसार, करीब 135 संभावित प्रश्न अभ्यर्थियों को याद कराने का दावा किया गया। इनमें लगभग 120 प्रश्न परीक्षा में पूछे गये सवालों से हू-ब-हू या काफी हद तक मेल खाते पाए गये। इसके बाद सीआईडी ने कई अभ्यर्थियों से पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटानी शुरू की।
350 से अधिक अभ्यर्थियों के बयान दर्ज
जांच के दौरान अब तक लगभग 350 अभ्यर्थियों और मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। बताया जा रहा है कि प्रतिदिन करीब 20 अभ्यर्थियों को बुलाकर उनके बयान दर्ज किये जा रहे हैं। साथ ही परीक्षा एजेंसियों और संबंधित कंपनियों के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
संदिग्धों के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल भी निकाली जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि कौन-कौन लोग आपस में संपर्क में थे और कथित लेन-देन का नेटवर्क किस स्तर तक फैला हुआ था।
11 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी
सीजीएल मामले में सीआईडी अब तक 11 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दौरान कथित प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराने और अभ्यर्थियों तक पहुंचाने वाले नेटवर्क से जुड़े कई नाम सामने आये हैं। एजेंसी इन लोगों की भूमिका की अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही है।
JSSC कार्यालय से जुटाये गये डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य
आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर सीआईडी ने जेएसएससी के नामकुम स्थित कार्यालय में भी छापेमारी की थी। इस दौरान ओएमआर शीट, डिजिटल सामग्री और चयन प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गयी। आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से भी पूछताछ की गयी।
जांच में यह दावा सामने आया कि परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को नेपाल के विराटनगर और बोकारो के होटलों में ठहराया गया था। वहां उन्हें परीक्षा में आने वाले संभावित सवालों के जवाब याद कराने की बात कही गयी है। जांच में अलग-अलग अभ्यर्थियों के लिए 65 से 135 तक प्रश्न तैयार किये जाने की जानकारी सामने आने की बात कही गयी है।
12 से 70 लाख रुपये तक वसूली का आरोप
सीआईडी की जांच में कथित तौर पर अभ्यर्थियों से 12 लाख रुपये से लेकर 70 लाख रुपये तक लिये जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी के अनुसार, 15 अभ्यर्थियों से करीब 1.80 करोड़ रुपये की रकम लिये जाने का दावा किया गया है। हालांकि पूरे आर्थिक लेन-देन की वास्तविक तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
22 परीक्षाओं पर भी पड़ा असर
जांच में सामने आये तथ्यों के बाद राज्य सरकार ने टीडीपीएल एजेंसी से जुड़ी परीक्षाओं के परिणामों पर रोक लगाने की कार्रवाई की। इसके बाद 22 परीक्षाओं को रद्द करने से संबंधित अधिसूचना भी जारी की गयी।
अभय तिवारी को बताया जा रहा मुख्य कड़ी
जांच में अभय तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी का नाम प्रमुख आरोपियों में सामने आया है। उस पर परीक्षा में कथित सेटिंग के जरिये सफलता हासिल करने का आरोप है। जांच एजेंसी के अनुसार उसने सीजीएल परीक्षा में 48वीं रैंक प्राप्त की थी।
अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और उनकी पत्नी सुषमा कुमारी की भूमिका की भी जांच की गयी। दोनों पर भी परीक्षा में कथित गड़बड़ी के जरिये सफलता हासिल करने का आरोप है और पूछताछ के बाद उनकी गिरफ्तारी की गयी।
प्रिंटिंग एजेंसी से जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई
प्रश्नपत्र की छपाई और कथित लीक से जुड़े पहलुओं की जांच के दौरान वेबेल कंपनी से जुड़े मिथिलेश सिंह, राकेश सिंह और उमाकांत प्रामाणिक के नाम सामने आये। सीआईडी ने उनकी तलाश में पटना और दिल्ली सहित कई स्थानों पर छापेमारी की। इनमें कुछ आरोपी अभी फरार बताये जा रहे हैं।
मिथिलेश सिंह की ओर से प्रश्नपत्र प्रकाशन का काम जिस निजी एजेंसी आईसीएन को दिया गया था, उससे जुड़े सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को गिरफ्तार किया जा चुका है।
नेपाल में नेटवर्क चलाने वालों की भी तलाश
जांच एजेंसी की नजर उन कथित एजेंटों और बिचौलियों पर भी है, जिन्होंने नेपाल में अभ्यर्थियों के ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं में भूमिका निभाई थी। राम प्रवेश यादव, रघुवीर यादव, संदीप त्रिपाठी, अनिश कुमार और विनय शाह समेत अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है।
जांच पूरी होने के बाद साफ होगी तस्वीर
फिलहाल सीआईडी दस्तावेजों, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों के बयानों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और गिरफ्तारियां हो सकती हैं तथा नये तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि पेपर लीक, कथित परीक्षा सिंडिकेट और प्रत्येक आरोपी की वास्तविक भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।



