पलामू। कभी शाम ढलते ही जिन सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था और नक्सली बंद के ऐलान के बाद आवागमन तक रुक जाता था, आज वही सड़कें विकास और बदलते माहौल की नई तस्वीर पेश कर रही हैं। पलामू प्रमंडल के पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों से गुजरने वाले नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे अब पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित नजर आ रहे हैं।
एक दौर ऐसा भी था जब इन इलाकों में नक्सली गतिविधियों का असर सड़क यातायात पर साफ दिखाई देता था। 2004 के बाद सड़क मार्गों पर हुए अलग-अलग नक्सली हमलों में 60 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की जान जाने का उल्लेख मिलता है। नक्सलियों के बंद और फरमान का असर इतना व्यापक था कि शाम के बाद बड़ी संख्या में लोग घरों से निकलने से बचते थे।
सड़कें बनीं बदलाव की पहचान
समय के साथ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई और नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस की रणनीति बदली। इसका असर अब सड़कों पर भी दिखाई दे रहा है। जिन मार्गों पर कभी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती थी, वहां अब दिन के साथ-साथ रात में भी आवागमन बढ़ा है।
सड़कों के किनारे नए बाजार विकसित हो रहे हैं। कई स्थानों पर लोगों ने घर और व्यवसायिक प्रतिष्ठान बनाने शुरू किए हैं। सरकारी और निजी संस्थानों की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि कभी नक्सली प्रभाव के कारण पिछड़े इन इलाकों में सामान्य जनजीवन धीरे-धीरे मजबूत हुआ है।
पलामू प्रमंडल से होकर गुजरने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग भी इस बदलाव के गवाह हैं। रांची से मुड़ीसेमर तक जाने वाला मार्ग, जिसे पहले एनएच-75 के नाम से जाना जाता था, अब एनएच-39 के रूप में जाना जाता है और इसके फोरलेन निर्माण का काम भी चल रहा है। वहीं पलामू को बिहार के औरंगाबाद से जोड़ने वाला मार्ग अब एनएच-139 के रूप में जाना जाता है।
2014 के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर
सड़कों को नक्सली गतिविधियों से सुरक्षित बनाने के लिए वर्ष 2014 के बाद पुलिस ने विशेष कार्ययोजना तैयार की। संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां पुलिस पिकेट और सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए। हाईवे पर जवानों की तैनाती बढ़ाई गई और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी के लिए जांच अभियान चलाए गए।
रांची-पलामू मार्ग समेत ग्रामीण इलाकों की महत्वपूर्ण सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया। कई स्थानों पर पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ भी हुईं। लगातार चलाए गए अभियानों और सुरक्षा रणनीति का असर यह हुआ कि 2018-19 तक हाईवे पर नक्सली प्रभाव काफी कमजोर पड़ गया।
इसके बाद भी अभियान जारी रहा और 2023-24 तक पलामू प्रमंडल से गुजरने वाले प्रमुख सड़क मार्गों से नक्सली प्रभाव लगभग पूरी तरह समाप्त करने का दावा किया गया।
सुरक्षा के साथ बढ़ा आर्थिक गतिविधियों का दायरा
सड़क सुरक्षा में सुधार का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं रहा। हाईवे के आसपास बाजार, दुकानें और बस्तियां विकसित होने लगी हैं। लोगों में रात के समय भी यात्रा करने का भरोसा बढ़ा है। इससे स्थानीय कारोबार और रोजगार की गतिविधियों को भी गति मिली है।
ग्रामीणों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले जिस सड़क पर शाम के बाद निकलना जोखिम भरा माना जाता था, वहां अब देर शाम तक वाहनों की आवाजाही सामान्य दिखाई देती है। यही बदलाव पलामू प्रमंडल में नक्सल प्रभाव से सामान्य स्थिति की ओर लौटने की सबसे बड़ी तस्वीर माना जा रहा है।
सड़क से विकास तक पहुंची बदलाव की कहानी
पुलिस की सुरक्षा रणनीति, लगातार अभियान और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने सड़क मार्गों को सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाई। अब यही मार्ग सिर्फ एक स्थान को दूसरे स्थान से जोड़ने का जरिया नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र में लौटते विश्वास, बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और विकास की कहानी भी सामने रख रहे हैं।



