BPSC 72nd Prelims Exam: BPSC 72वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (CCE) की प्रीलिम्स परीक्षा डिप्टी कलेक्टर, DSP, BDO जैसे प्रतिष्ठित पदों तक पहुंचने का पहला पडाव है. यह सिर्फ एक स्क्रीनिंग टेस्ट है, यानी इसके नंबर फाइनल मेरिट में नहीं जुडते, लेकिन इसे पार किए बिना मेन्स परीक्षा में बैठने का मौका ही नहीं मिलता.
BPSC 72nd Prelims Exam: प्रीलिम्स में सिर्फ एक ही पेपर होता है, सामान्य अध्ययन यानी जनरल स्टडीज. यह पूरी तरह ऑब्जेक्टिव टाइप एग्जाम है और OMR शीट पर लिया जाता है. इस एग्जाम में सवालों का पैटर्न कैसा होता है और निगेटिव मार्किंग का क्या प्रावधान है यहां देख सकते हैं.
BPSC 72nd Prelims Exam: एक नजर में समझें एग्जाम पैटर्न
| पैरामीटर | विवरण |
| पेपर | सामान्य अध्ययन (एक ही पेपर) |
| प्रश्नों की संख्या | 150 MCQs |
| कुल अंक | 150 (हर सवाल 1 अंक) |
| समय सीमा | 2 घंटे (120 मिनट) |
| नेगेटिव मार्किंग | हर गलत उत्तर पर 1/3 अंक कटौती |
| परीक्षा का प्रकार | क्वालिफाइंग (सिर्फ छनाई के लिए) |
| भाषा | हिंदी और अंग्रेजी दोनों में |
नेगेटिव मार्किंग का गणित समझें
150 सवालों में हर गलत जवाब पर 0.33 अंक कट जाता है, यानी तीन गलत जवाब मिलकर एक सही जवाब के बराबर नुकसान कर देते हैं. इसलिए बिना सोचे-समझे अंदाजे से जवाब देना घाटे का सौदा बन सकता है. जिन सवालों में कम से कम एक-दो गलत ऑप्शन साफ पता चल जाएं, वहीं जवाब देना समझदारी है.
पिछले सालों का कटऑफ ट्रेंड
पिछली कुछ परीक्षाओं के आंकडे देखें तो सामान्य वर्ग (पुरुष) का कटऑफ 150 में से 88 से 92 अंक के आसपास रहा है. सुरक्षित रहने के लिए 100 से ऊपर अंक लाने का लक्ष्य रखना बेहतर रणनीति मानी जाती है, ताकि मेन्स में जाने का भरोसेमंद मौका बना रहे.
तैयारी के लिए 5 जरूरी टिप्स
- NCERT से नींव मजबूत करें: कक्षा 6 से 12 तक की NCERT किताबें पहले पूरी पढें, फिर स्टैंडर्ड बुक्स की तरफ बढें. इतिहास, भूगोल, राजव्यवस्था और विज्ञान का बेस बनाने के लिए यह सबसे भरोसेमंद तरीका है.
- बिहार जीके पर खास फोकस रखें: हर विषय को बिहार के नजरिए से भी पढें, क्योंकि करीब 18-20 प्रतिशत सवाल बिहार से जुडे ही आते हैं. यह सबसे स्कोरिंग हिस्सा है, फिर भी ज्यादातर उम्मीदवार इसे नजरअंदाज करते हैं.
- रोजाना करेंट अफेयर्स पढ़ें: पिछले 12 से 18 महीने की राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और बिहार से जुडी घटनाओं पर नजर रखें. सरकारी योजनाएं, बजट और नियुक्तियां जैसी जानकारी नियमित रूप से नोट करते रहें, ताकि आखिरी समय में बोझ न बने.
- मॉक टेस्ट और पुराने पेपर जरूर हल करें: प्रीलिम्स से पहले कम से कम 20 से 25 फुल-लेंथ मॉक टेस्ट देना जरूरी है. हर टेस्ट के बाद गलतियों का विश्लेषण करें, ताकि कमजोर विषयों की पहचान होकर समय रहते सुधार हो सके.
- समय प्रबंधन की प्रैक्टिस करें: 150 सवाल और 120 मिनट का मतलब है हर सवाल पर औसतन 48 सेकंड. पहले आसान सवाल हल करें, फिर मध्यम स्तर के, और मुश्किल सवालों को सबसे आखिर में रखें ताकि समय बर्बाद न हो.



